
उच्च शिक्षण संस्थानों में वंचित वर्गों को मिलने वाले आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने संसद की एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 15(5) के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी किसी स्वतंत्र नियामक संस्था को सौंपी जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यह प्रावधान सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने साफ कहा कि अनुच्छेद 15(5) सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम रहा है और इसे कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करने की जरूरत है। इस अनुच्छेद के तहत निजी और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ के तहत देश में उच्च शिक्षा के लिए एक एकल नियामक बनाने का प्रस्ताव है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और अगले ही दिन इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि यदि एक नया नियामक बनाया जा रहा है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 15(5) के पालन की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए, ताकि आरक्षण के प्रावधानों की नियमित निगरानी हो सके।
अनुच्छेद 15(5): सामाजिक न्याय की मजबूत नींव
कांग्रेस महासचिव ने याद दिलाया कि अनुच्छेद 15(5) को करीब बीस साल पहले 93वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था। यह संशोधन डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुआ था। इसके जरिए IIT, IIM, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और NIT जैसे केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित संस्थानों में OBC छात्रों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ हुआ।
उनका कहना है कि बीते दो दशकों में लाखों OBC छात्रों ने इस आरक्षण का लाभ उठाया है, जिससे न सिर्फ उन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर मिले, बल्कि समाज में आर्थिक और सामाजिक गतिशीलता भी बढ़ी।
निजी संस्थानों में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
जयराम रमेश ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 15(5) सरकार को निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में भी SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण लागू करने की अनुमति देता है। हालांकि, इस प्रावधान को अदालत में चुनौती दी गई थी।
उन्होंने 6 मई 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें ‘प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ’ मामले में शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 15(5) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। कोर्ट ने साफ कहा था कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में भी वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति है। इसके बावजूद अब तक संसद ने ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है, जो निजी संस्थानों में इस प्रावधान को अनिवार्य रूप से लागू कर सके।
संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला
कांग्रेस नेता ने अगस्त 2025 में शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। इस रिपोर्ट में संसद से आग्रह किया गया था कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण अनिवार्य करने वाला कानून बनाया जाए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है, जो सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
मोदी सरकार से पूर्ण क्रियान्वयन की मांग
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अनुच्छेद 15(5) में निहित सामाजिक न्याय के सिद्धांत के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस संवैधानिक प्रावधान को पूरी तरह लागू करे और उच्च शिक्षा में वंचित वर्गों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
कांग्रेस का मानना है कि अगर शिक्षा में समान अवसर नहीं मिलेंगे, तो ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा रह जाएगा।




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