
दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को लेकर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) की एक नई रिसर्च ने अहम और चिंताजनक संकेत दिए हैं। अध्ययन में सामने आया है कि आज की लड़कियां पहले की तुलना में कम उम्र में शारीरिक रूप से परिपक्व हो रही हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि असंतुलित खानपान, जंक फूड की बढ़ती आदत और मोटापा शरीर में हार्मोनल बदलाव को जल्दी शुरू कर रहे हैं। विशेषज्ञ इसे माता-पिता, स्कूलों और समाज के लिए एक स्पष्ट चेतावनी मान रहे हैं।
बच्चों के विकास के पैटर्न में दिखा बदलाव
रिसर्च के दौरान स्कूली छात्राओं के शारीरिक विकास और प्यूबर्टी की शुरुआत के पैटर्न का गहराई से अध्ययन किया गया। नतीजों से पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के बढ़ने की प्रक्रिया में साफ बदलाव आया है। मौजूदा पीढ़ी की लड़कियों में किशोरावस्था जल्दी शुरू हो रही है और इस दौरान उनकी लंबाई बढ़ने की रफ्तार भी पहले से अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे पोषण, जीवनशैली और शरीर के बढ़ते वजन की अहम भूमिका है।
2018 से चल रहा था यह अध्ययन
यह प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट स्टडी वर्ष 2018 में शुरू की गई थी, जिसमें 3 से 18 वर्ष की उम्र की 2470 स्कूली छात्राओं को शामिल किया गया। माता-पिता की सहमति के बाद करीब ढाई साल तक इन छात्राओं की नियमित निगरानी की गई।
हर छह महीने में स्कूल विजिट के दौरान उनकी लंबाई और वजन मापा गया, जबकि प्यूबर्टी से जुड़े शारीरिक बदलावों का आकलन साल में एक बार किया गया। इससे शोधकर्ताओं को विकास के हर चरण को समझने में मदद मिली।
पहले शुरू हो रही प्यूबर्टी
अध्ययन में शामिल छात्राओं की औसत उम्र करीब 10 वर्ष थी। रिसर्च के अनुसार, स्तनों का विकास (थेलार्चे) औसतन 10 साल की उम्र में शुरू हो रहा है। माहवारी की शुरुआत (मेनार्चे) की औसत उम्र करीब 12 साल पाई गई। यह उम्र पहले के आंकड़ों की तुलना में कम मानी जा रही है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि प्यूबर्टी अब पहले शुरू हो रही है।
प्यूबर्टी के दूसरे चरण में लड़कियों की लंबाई बढ़ने की गति सबसे तेज देखी गई। इस दौरान हर साल औसतन 6 सेंटीमीटर से अधिक लंबाई बढ़ी, जो अन्य चरणों से ज्यादा है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि ज्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त लड़कियों में प्यूबर्टी और माहवारी और भी जल्दी शुरू हो रही है।
माता-पिता के लिए जरूरी संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ बच्चों के शारीरिक विकास का पैटर्न बदल रहा है। बेहतर लेकिन असंतुलित पोषण, शहरी जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खानपान की बिगड़ती आदतें इसके मुख्य कारण हैं। डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे अध्ययन माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के विकास को समझने में मदद करते हैं और समय पर सही मार्गदर्शन देने का अवसर देते हैं।
खानपान और लाइफस्टाइल पर दें ध्यान
डॉ. आशीमा डबास के अनुसार, बच्चों के खानपान और आसपास के माहौल का उनके शारीरिक विकास पर गहरा असर पड़ रहा है। समय से पहले होने वाले शारीरिक बदलाव आगे चलकर स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। ऐसे में बच्चों की डाइट, जंक फूड से दूरी और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो बच्चों के स्वस्थ विकास को बेहतर दिशा दी जा सकती है।




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