
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026 में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के युवाओं, कौशल विकास और बदलते अवसरों को लेकर अहम बातें रखीं। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश आज अवसरों के ऐतिहासिक लोकतांत्रिकरण के दौर से गुजर रहा है, जहां युवाओं को अपनी छिपी प्रतिभा पहचानने, अपनी पसंद का रास्ता चुनने और कौशल को स्थायी आजीविका में बदलने की आज़ादी मिली है।
पीएचडी हाउस, नई दिल्ली में अपने संबोधन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज का युवा पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है और नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों व संस्थानों को अब सिर्फ सलाह देने के बजाय युवाओं को ध्यान से सुनना सीखना होगा। उन्होंने जोर दिया कि अब संस्थानों की भूमिका लंबे भाषण देने वालों की नहीं, बल्कि मार्गदर्शन देने वाले और सुविधा उपलब्ध कराने वालों की होनी चाहिए।
डिग्री नहीं, कौशल की अहमियत
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने पहली बार ऐसा समग्र इकोसिस्टम तैयार किया है, जहां युवा अपनी क्षमता को पहचान कर यह तय कर सकते हैं कि वे किस काम के लिए सबसे उपयुक्त हैं। उन्होंने डिग्री हासिल करने की सोच से आगे बढ़कर कौशल में दक्ष बनने की जरूरत पर बल दिया।
सीएसआईआर के अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे हजारों युवा, जिनमें कई के पास औपचारिक डिग्री नहीं है, लैवेंडर और अन्य सुगंधित फसलों की खेती से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक समय देश में केवल आईटी सेक्टर को ही सफलता की कुंजी माना जाता था, लेकिन आज कृषि, पारंपरिक कौशल और स्थानीय क्षमताएं भी बड़े बदलाव ला रही हैं।
NEP 2020 से बदला करियर का नजरिया
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस नीति ने विषयों की कठोर सीमाओं को तोड़ा है और छात्रों को करियर चुनने की आज़ादी दी है। उन्होंने कहा कि पहले छात्रों पर करियर थोप दिए जाते थे, लेकिन अब वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार रास्ता चुन सकते हैं।
छोटे शहरों और गांवों से उभर रही प्रतिभा
डॉ. सिंह ने बताया कि यह बदलाव सिविल सेवाओं से लेकर स्टार्टअप सेक्टर तक साफ दिखाई दे रहा है। आज सिविल सेवा के टॉपर छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं। वहीं, देश के 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप अब महानगरों से बाहर उभर रहे हैं। इससे यह मिथक टूट रहा है कि नवाचार केवल बेंगलुरु, दिल्ली या हैदराबाद जैसे शहरों तक सीमित है।
विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने महिला नेतृत्व वाली विकास परियोजनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक, महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। चंद्रयान-3 और आदित्य मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इन मिशनों का नेतृत्व महिला वैज्ञानिकों ने किया। साथ ही, मुद्रा योजना के 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा संकेत है।
पेटेंट और नवाचार में भारत की मजबूत पकड़
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवाचार और पेटेंट के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान तेजी से बढ़ी है। आज भारत पेटेंट फाइलिंग के मामले में शीर्ष देशों में शामिल है और इनमें से आधे से ज्यादा पेटेंट भारतीयों द्वारा दायर किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आईटी के बाद अब बायोटेक्नोलॉजी अगली बड़ी औद्योगिक क्रांति बनने की ओर बढ़ रही है।
युवाओं को सुनना समय की जरूरत
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं से अपील की कि वे पुराने तरीकों से बाहर निकलें और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, अब जरूरी है कि हम खुले विचारों के साथ युवाओं से सीखें और उन्हें सही दिशा देने में सहयोग करें।




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