
विवेकपूर्ण पत्रकारिता और भारत के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को दुनिया तक पहुँचाने वाले दिग्गज पत्रकार सर विलियम मार्क टली का 25 जनवरी 2026 को नयी दिल्ली के मैक्स अस्पताल, साकेत में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे, जिसके बाद मल्टी-ऑर्गन फेल्योर की जटिलताओं के कारण उनका देहांत हुआ।
मार्क टली का जीवन भारत और पत्रकारिता के बीच एक अद्वितीय सेतु था। उन्हें बीबीसी के लिए दक्षिण एशिया के सबसे भरोसेमंद संवाददाता के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने दशकों तक भारत की राजनीति, समाज, सांस्कृतिक उत्थान और संघर्षों को निष्पक्ष, गहराईपूर्ण और संवेदनशील ढंग से विश्व के सामने पेश किया।
टली का जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुआ था। ब्रिटिश मूल के होने के बावजूद भारत के प्रति उनका लगाव गहरा था। प्रारंभिक शिक्षा भारत में ही बिताने के बाद उन्होंने इंग्लैंड में शिक्षा पूरी की, और फिर पत्रकारिता की ओर रुख किया।
1960 के दशक में उन्होंने बीबीसी जॉइन किया और 1971 में उन्हें नयी दिल्ली ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने लगभग 22 वर्षों तक संभाला। इसके बाद भी वे दक्षिण एशिया के लिए प्रमुख संवाददाता रहे, और दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए भारत संबंधित खबरों की “आवाज़” बने रहे।
उनकी पत्रकारिता का विस्तार भारत-पाक युद्ध, आपातकाल (1975–77), ऑपरेशन ब्लू स्टार, भोपाल गैस त्रासदी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या, और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसे ऐतिहासिक अवसरों तक रहा। इन सभी महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग उन्होंने सूक्ष्मता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ की, जिससे वे श्रोताओं के बीच गहरी विश्वसनीयता और सम्मान के पात्र बने।
टली सिर्फ रिपोर्टर नहीं थे — वे इतिहास के जीवंत गवाह और संवाददाता थे। भारत की राजनीति, सामाजिक जटिलताओं और विविधता को समझने और उसे सरल भाषा में विश्व के सामने रखने की उनकी क्षमता अद्वितीय थी। उनके परिचितों का कहना है कि भारत उनका घर बन गया था और वे दिल्ली के जीवन का एक आम और स्नेही हिस्सा बन गए थे।
पत्रकार के रूप में उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें No Full Stops in India, India in Slow Motion और The Heart of India जैसी रचनाएँ शामिल हैं। इसके अलावा वे बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम “Something Understood” के भी प्रमुख थे।
मार्क टली का योगदान सिर्फ समाचार प्रसारण तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने भारत को एक जीवंत, जटिल और सुंदर देश के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उनके काम को भारत सरकार ने पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी सम्मानित किया, और ब्रिटेन की ओर से उन्हें नाइटहुड (Sir) की उपाधि दी गई।
उनके निधन पर भारत के प्रधानमंत्री सहित अनेक नेताओं और पत्रकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें पत्रकारिता के एक महान स्तम्भ के रूप में याद किया।
मार्क टली के जाने से सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि भारत की विविधता और उसकी कहानियों को दुनियाभर तक पहुँचाने वाली एक आवाज भी हमेशा के लिए मौन हो गई। उनकी लेखनी, विचारशीलता और निष्पक्ष दृष्टिकोण पीढ़ियों तक याद रखे जाएंगे।
विनम्र श्रद्धांजलि, सर मार्क टली। आपकी पत्रकारिता और मानवीय दृष्टि को नमन।




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