
केंद्र सरकार 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 का अंतरिम बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। बजट से पहले शिक्षा क्षेत्र पर सबकी नज़र टिकना स्वाभाविक है, क्योंकि हाल के वर्षों में सरकार ने स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक कई अहम सुधारों पर जोर दिया है। ऐसे में पिछले पांच वर्षों के शिक्षा बजट को समझना जरूरी हो जाता है, ताकि यह जाना जा सके कि इस दौरान शिक्षा में निवेश कितना बढ़ा और किन योजनाओं पर जोर रहा।
2021-22: महामारी के बाद पुनर्गठन का साल
वित्त वर्ष 2021 में शिक्षा मंत्रालय को 93,224 करोड़ रुपये का आवंटन मिला। यह राशि पिछले वर्ष के वास्तविक खर्च से करीब 2.1% अधिक थी।
इस बजट की खास बात यह रही कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। नए स्कूलों की स्थापना और लेह में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा इसी वर्ष हुई।
स्कूली शिक्षा के लिए 54,874 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए, जबकि उच्च शिक्षा के लिए 38,351 करोड़ रुपये का प्रावधान था।
2022-23: शिक्षा में बढ़ता निवेश
वित्त वर्ष 2022 में शिक्षा बजट बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 2021-22 के संशोधित खर्च से 18.5% अधिक था, जो यह संकेत देता है कि सरकार का फोकस शिक्षा के विस्तार पर और मजबूत हुआ।
इस वर्ष स्कूली शिक्षा के लिए 63,449 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 40,828 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। मॉडेल स्कूलों, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं पर विशेष जोर रहा।
2023-24: समग्र शिक्षा पर बल
वित्त वर्ष 2023 में शिक्षा मंत्रालय के लिए 1,12,899 करोड़ रुपये रखे गए, जो पिछले बजट की तुलना में 13% ज्यादा थे। यह कुल सरकारी व्यय का 2.9% था।
समग्र शिक्षा अभियान के लिए 37,453 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया।
स्कूली शिक्षा को 68,805 करोड़ रुपये मिले, जबकि उच्च शिक्षा बजट 44,095 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस वर्ष सरकार ने एकलव्य मॉडल स्कूलों के लिए 38,000 से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की योजना भी पेश की।
2024-25: कौशल विकास और संस्थानों का विस्तार
वित्त वर्ष 2024 में स्किल इंडिया मिशन के तहत 1.4 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया। उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सात नए IIT, 16 IIIT, 15 AIIMS और 7 IIM स्थापित किए गए।
इस बजट का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा की पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार-उन्मुख कौशल देना भी था, ताकि वे तेजी से बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
2025-26: शिक्षा बजट में नियंत्रित वृद्धि
केंद्रीय बजट 2025 में शिक्षा के लिए 1,28,650 करोड़ रुपये का आवंटन घोषित किया गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 6.65% की वृद्धि है।
पिछले वर्ष शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को मिलाकर 1.48 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जिसमें से लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये स्कूल और उच्च शिक्षा पर खर्च के लिए निर्धारित थे।
पिछले पांच वर्षों में शिक्षा क्षेत्र का बजट लगातार बढ़ा है। सरकार ने न केवल बुनियादी ढांचे और संस्थानों के विस्तार पर जोर दिया, बल्कि कौशल विकास को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी को आने वाले अंतरिम बजट पर होगी कि शिक्षा के लिए अगले चरण में सरकार क्या नई पहलें पेश करती है।




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