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क्या वाकई Gen Z का IQ पिछली पीढ़ियों से कम है? रिसर्च क्या कहती है

क्या वाकई Gen Z का IQ पिछली पीढ़ियों से कम है? रिसर्च क्या कहती है

क्या वाकई Gen Z का IQ पिछली पीढ़ियों से कम है? रिसर्च क्या कहती है

दुनियाभर में इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या Gen Z अपने माता-पिता से कम समझदार है? यह बहस कुछ हालिया स्टडीज़ और IQ ट्रेंड्स के विश्लेषण के बाद और तेज हो गई है, जिनमें दावा किया गया है कि Gen Z की औसत इंटेलेक्चुअल क्षमता उनके पैरेंट्स, यानी मिलेनियल्स और उससे पहले की पीढ़ियों के मुकाबले कम रिकॉर्ड की गई है। यह दावा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि दशकों तक यह माना जाता रहा कि हर नई पीढ़ी का औसत IQ पिछली पीढ़ी से बेहतर होता है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किन लोगों को Gen Z और Millennials माना जाता है। Gen Z आमतौर पर उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। यह वही पीढ़ी है जिसने बचपन से ही स्मार्टफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट और सोशल मीडिया को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा पाया। दूसरी तरफ Millennials वे लोग हैं जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच हुआ। इन्होंने बचपन एनालॉग दुनिया में बिताया और युवावस्था में तकनीक का विस्तार देखा। यही फर्क दोनों पीढ़ियों की टेक्नोलॉजी समझ में बड़ा अंतर पैदा करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों ने संकेत दिया है कि फ्लिन इफेक्ट—जिसके तहत हर नई पीढ़ी का औसत IQ बेहतर होता था—अब कई देशों में कमजोर पड़ता दिख रहा है। कुछ स्टडीज में यह भी देखा गया कि पिछले एक दशक में Gen Z के स्कोर फॉर्मल एजुकेशन, कंसंट्रेशन और समस्या-समाधान क्षमता जैसे क्षेत्रों में स्थिर या घटते नजर आए हैं। जबकि Millennials इन पैमानों पर अब भी अपेक्षाकृत मजबूत दिखते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल IQ स्कोर से पूरी बुद्धिमत्ता को मापा नहीं जा सकता, फिर भी यह बदलाव नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि Gen Z में IQ गिरावट की सबसे बड़ी वजह डिजिटल ओवरलोड है। यह पीढ़ी अधिकांश समय स्मार्टफोन, नोटिफिकेशन, रील्स और तेज़-गति वाले कंटेंट के बीच गुजारती है, जो ध्यान अवधि पर असर डालता है। लगातार मल्टीटास्किंग के कारण गहन विचार और फोकस कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं Millennials ने बचपन में किताबों, लंबे संवाद और ऑफलाइन अनुभवों के साथ अधिक समय बिताया—जो धैर्य और विश्लेषणात्मक सोच को मजबूत बनाते हैं।

इसके साथ ही शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव, पढ़ने की आदत में कमी, नींद की कमी और मानसिक तनाव को भी IQ में गिरावट की संभावित वजह माना जा रहा है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि Gen Z के पास जानकारी बहुत है, लेकिन उसे गहराई से समझने और विश्लेषण करने का अभ्यास कम होता जा रहा है। इसका सीधा असर उन IQ टेस्टों पर दिख सकता है जो तर्क, फोकस और समस्या-समाधान क्षमता को महत्व देते हैं।

फिर भी यह कहना गलत होगा कि Gen Z कम बुद्धिमान है। इस पीढ़ी की ताकतें अलग तरह की हैं—जैसे डिजिटल स्किल्स, तेजी से सीखने की क्षमता, क्रिएटिव अप्रोच, सोशल अवेयरनेस और टेक्नोलॉजी की गहरी समझ। वे नई चुनौतियों के साथ खुद को सहजता से ढाल लेते हैं, जो आधुनिक दुनिया की जरूरत है।

कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि इंटेलिजेंस का स्वरूप बदल रहा है। Millennials जहां पारंपरिक बौद्धिक पैमानों पर आगे दिखते हैं, वहीं Gen Z नई दुनिया के लिए जरूरी आधुनिक स्किल्स लेकर आई है। इसलिए दोनों पीढ़ियों की तुलना सिर्फ IQ के आधार पर करना पूरी तस्वीर नहीं बताती है। 

Asmita Sarkar

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