
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अहम और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर अब मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ यूनिवर्सिटी कर दिया गया है। इस फैसले की घोषणा शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने राज्य विधानसभा में की। अब यह विश्वविद्यालय आधिकारिक तौर पर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ यूनिवर्सिटी, बरहामपुर के नाम से जाना जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि मुर्शिदाबाद की उस ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने की कोशिश है, जिसका शिक्षा के क्षेत्र में गहरा योगदान रहा है। शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में बताया कि महाराजा कृष्णनाथ ने अपने पूरे जीवन और संपत्ति को मुर्शिदाबाद के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। बेहद कम उम्र में, महज 22 साल के जीवनकाल में, उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया।
ब्रात्य बसु ने कहा कि महाराजा कृष्णनाथ के सम्मान में यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. रेजाउल करीम ने सबसे पहले इस संस्थान का नाम महाराजा कृष्णनाथ के नाम पर रखने का सुझाव दिया था। हालांकि, इसे अमल में आने में 123 साल लग गए। शिक्षा मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस ऐतिहासिक चूक को सुधारते हुए विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मंजूरी दी, ताकि एक ऐसे व्यक्तित्व को उचित सम्मान मिल सके, जिसने शिक्षा के लिए अपना सबकुछ दान कर दिया।
इस संस्थान का इतिहास भी काफी पुराना और गौरवशाली रहा है। इसकी शुरुआत वर्ष 1853 में बरहामपुर कृष्णनाथ कॉलेज के रूप में हुई थी। बाद में जब कॉलेज का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद कॉलेज किया गया, तो स्थानीय स्तर पर असंतोष भी सामने आया। कई लोगों का मानना था कि इससे संस्थान की मूल पहचान और ऐतिहासिक जुड़ाव कमजोर हुआ है। लंबे समय से मांग उठ रही थी कि शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े उस ऐतिहासिक नाम को फिर से बहाल किया जाए।
अब विधानसभा से संबंधित विधेयक के पारित होने के बाद यह मांग पूरी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ इतिहास को सम्मान मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों का विश्वविद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होगा।
इस निर्णय का राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक मोहम्मद अली और बशीरहाट उत्तर से विधायक रफीकुल इस्लाम मंडल ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लोगों की भावनाओं का सम्मान हुआ है। हैरानी की बात यह रही कि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने भी इस फैसले का समर्थन किया और राज्य सरकार का आभार जताया।
कुल मिलाकर, मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ यूनिवर्सिटी करना एक ऐसा कदम माना जा रहा है, जो शिक्षा, इतिहास और स्थानीय पहचान को एक साथ जोड़ता है। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को उस विरासत की याद दिलाएगा, जिसने मुर्शिदाबाद में शिक्षा की नींव मजबूत की थी।




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