
भारत में मेडिकल एजुकेशन को लेकर प्रतिस्पर्धा हर साल और कड़ी होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि 1.37 लाख के आसपास MBBS सीटों के लिए 20 लाख से ज्यादा छात्र NEET-UG परीक्षा में शामिल होते हैं। इस साल भी NEET-UG के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 8 मार्च तक चलेगी, जबकि परीक्षा 3 मई को आयोजित की जानी है। इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा में कई छात्र परीक्षा पास करने के बावजूद MBBS सीट हासिल नहीं कर पाते।
एक बड़ा वर्ग ऐसे छात्रों का भी है, जिन्हें प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन तो मिल जाता है, लेकिन वहां की भारी फीस उनके लिए बड़ी बाधा बन जाती है। ऐसे में विदेश में MBBS की पढ़ाई एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर सामने आई है। कई देश ऐसे हैं, जहां भारतीय छात्र कम बजट में, अंग्रेजी माध्यम में और मान्य डिग्री के साथ मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं।
रूस लंबे समय से भारतीय छात्रों के बीच मेडिकल एजुकेशन के लिए लोकप्रिय रहा है। यहां 23 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। रूस में MBBS का कुल खर्च आमतौर पर 20 से 35 लाख रुपये के बीच रहता है। छह साल में इंटर्नशिप सहित कोर्स पूरा हो जाता है। कजान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी और शेचेनोव फर्स्ट मॉस्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान यहां प्रमुख माने जाते हैं।
किर्गिस्तान कम बजट में MBBS की पढ़ाई के लिए तेजी से पसंद किया जा रहा है। यहां की ट्यूशन फीस अन्य देशों की तुलना में कम है, जिससे सीमित बजट वाले छात्रों को राहत मिलती है। कुल खर्च लगभग 15 से 25 लाख रुपये के बीच रहता है। पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी है और कोर्स की अवधि छह साल की होती है। किर्गिज स्टेट मेडिकल अकादमी, ओश स्टेट यूनिवर्सिटी और जलालाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी यहां के प्रमुख संस्थान हैं।
कजाकिस्तान भी मेडिकल एजुकेशन के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। यहां यूरोपीय मानकों पर आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है और रिसर्च पर खास ध्यान दिया जाता है। अगर बजट 18 से 30 लाख रुपये के बीच है, तो यहां MBBS करना संभव है। कजाख नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, अल-फराबी कजाख नेशनल यूनिवर्सिटी और सेमेय स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी मेडिकल पढ़ाई के लिए जानी जाती हैं।
उज्बेकिस्तान हाल के वर्षों में भारतीय MBBS छात्रों के लिए तेजी से उभरता हुआ डेस्टिनेशन बना है। यहां मेडिकल एजुकेशन के साथ अच्छी क्लिनिकल ट्रेनिंग पर जोर दिया जाता है। पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में होती है और कुल खर्च लगभग 20 से 32 लाख रुपये के बीच रहता है। ताशकंद मेडिकल अकादमी, समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट यहां के प्रमुख संस्थान हैं।
जॉर्जिया की बात करें तो यह विकल्प थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन यहां यूरोप जैसी जीवनशैली और मजबूत शिक्षा प्रणाली मिलती है। जॉर्जिया का एजुकेशन सिस्टम यूरोपियन क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम पर आधारित है। यहां MBBS का खर्च करीब 30 से 45 लाख रुपये तक हो सकता है। त्बिलिसी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, जॉर्जियन नेशनल यूनिवर्सिटी और डेविड ट्विल्डियानी मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में अंग्रेजी में पढ़ाई कराई जाती है।
कुल मिलाकर, जो छात्र NEET पास करने के बावजूद भारत में MBBS सीट या भारी फीस की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, उनके लिए विदेश में मेडिकल की पढ़ाई एक व्यावहारिक और किफायती रास्ता बन सकती है। सही जानकारी और मान्यता प्राप्त संस्थान चुनकर छात्र अपने मेडिकल करियर को मजबूत दिशा दे सकते हैं।




Add comment