
सीबीएसई बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रही हैं और अब परीक्षा में सिर्फ सही उत्तर लिखना ही काफी नहीं रह गया है। इस साल बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर छात्रों के अंकों पर पड़ सकता है। खास तौर पर कक्षा 10 की साइंस और सोशल साइंस परीक्षाओं में लागू किया गया नया “सेक्शन रूल” छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा के दौरान उत्तरों की प्रस्तुति अब पहले से कहीं ज्यादा मायने रखेगी। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के विस्तार के साथ यह जरूरी हो गया है कि छात्र न सिर्फ सवाल समझें, बल्कि उत्तर सही जगह और सही क्रम में लिखें। नियमों की अनदेखी करने पर सही जवाब होने के बावजूद अंक कटने का खतरा बना रहेगा।
साइंस और सोशल साइंस में लागू हुआ नया सेक्शन रूल
सीबीएसई ने इस बार कक्षा 10 के साइंस और सोशल साइंस विषयों में मूल्यांकन को ज्यादा सटीक और व्यवस्थित बनाने के लिए नया सेक्शन रूल लागू किया है। इसके तहत छात्रों को हर प्रश्न का उत्तर उसी सेक्शन में लिखना अनिवार्य होगा, जिस सेक्शन से वह प्रश्न पूछा गया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल चेकिंग सिस्टम में उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन होकर मूल्यांकनकर्ताओं तक पहुंचेंगी और जांच पूरी तरह सेक्शन-वाइज होगी। ऐसे में यदि कोई छात्र सही उत्तर भी गलत सेक्शन में लिख देता है, तो सिस्टम उसे पहचान नहीं पाएगा और अंक मिलने में परेशानी हो सकती है।
नया सेक्शन रूल क्या कहता है
सीबीएसई के निर्देशों के मुताबिक अब मूल्यांकनकर्ता हर सेक्शन को अलग-अलग जांचेंगे। डिजिटल स्कैनिंग के दौरान सिस्टम उत्तरों को सेक्शन के आधार पर पढ़ेगा। अगर उत्तर गलत सेक्शन में लिखा गया है, तो उसके छूटने या नजरअंदाज होने की आशंका बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब है कि सही उत्तर होने के बावजूद अंक न मिलने का जोखिम रहेगा।
उत्तर लिखते समय क्यों बढ़ गई सावधानी की जरूरत
परीक्षा के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी नुकसान का कारण बन सकती है। बोर्ड ने साफ किया है कि उत्तर लिखने से पहले सेक्शन का नाम और क्रम स्पष्ट होना चाहिए। एक ही सेक्शन के सभी उत्तर उसी हिस्से में लिखे जाएं और अलग-अलग सेक्शन के उत्तर आपस में न मिलें।
उत्तर पुस्तिका मिलने के बाद जल्दबाजी में लिखना शुरू करने की बजाय पहले प्रश्नपत्र और निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी होगा। नए प्रश्न की शुरुआत में उचित स्पेस और क्रम बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि उत्तर साफ और समझने योग्य रहें।
साइंस के पेपर में कैसे करें उत्तरों का प्रबंधन
विज्ञान की परीक्षा में छात्रों को उत्तर पुस्तिका को बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स—तीन अलग-अलग भागों में समझकर लिखना होगा। जिस विषय का प्रश्न हो, उसका उत्तर उसी सेक्शन में लिखा जाना चाहिए। इससे डिजिटल मूल्यांकन में उत्तर सही तरीके से दर्ज हो सकेंगे।
सोशल साइंस में चारों विषयों का रखें ध्यान
सोशल साइंस की परीक्षा में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के लिए अलग-अलग सेक्शन होंगे। छात्रों को हर प्रश्न का उत्तर उसी विषय से जुड़े सेक्शन में लिखना होगा। विषयों को आपस में मिलाने से अंक कटने का खतरा बढ़ सकता है।
डिजिटल मूल्यांकन की ओर तेजी से बढ़ रहा बोर्ड
सीबीएसई अब उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जा रहा है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए कॉपियां स्कैन होकर सीधे मूल्यांकनकर्ताओं तक पहुंचेंगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद है, लेकिन छात्रों के लिए उत्तर लिखने में अनुशासन और सटीकता पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
डिजिटल सिस्टम सेक्शन के आधार पर ही उत्तरों को पढ़ेगा। ऐसे में यदि जवाब तय सेक्शन के बाहर लिखा गया है, तो उसे ढूंढना या उस पर अंक देना मुश्किल हो सकता है।
री-इवैल्यूएशन में भी नहीं मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत री-इवैल्यूएशन के दौरान भी गलत सेक्शन में लिखे गए उत्तरों पर विशेष छूट मिलने की संभावना कम है। डिजिटल सिस्टम उसी संरचना में उत्तर दिखाता है, जिस क्रम में वे लिखे गए होते हैं। इसलिए शुरुआत से ही नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
सीबीएसई का कहना है कि इन बदलावों का मकसद मूल्यांकन को तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है। लेकिन छात्रों के लिए संदेश साफ है—अब केवल सही जवाब लिखना पर्याप्त नहीं है। उसे सही सेक्शन में, साफ और व्यवस्थित तरीके से लिखना भी उतना ही जरूरी है। बोर्ड परीक्षा 2026 में सफलता के लिए यही नई रणनीति सबसे अहम साबित हो सकती है।




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