
शिक्षा मंत्रालय 12 और 13 फरवरी को ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन करने जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह दो दिवसीय कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर और जिम्मेदार उपयोग को लेकर सहयोग और रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह कॉन्क्लेव आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है, जहां शिक्षा और तकनीक के बीच तालमेल को लेकर ठोस दिशा तय करने की कोशिश होगी।
कॉन्क्लेव में एआई आधारित शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इन चर्चाओं और पहलों का नेतृत्व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एआई फॉर एजुकेशन करेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में एआई से जुड़े प्रमुख भागीदारों की पहचान करना, नए नवाचारों को सामने लाना और उन अवसरों पर बात करना है, जिनसे पढ़ाई को ज्यादा प्रभावी, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सके।
एक वरिष्ठ मंत्रालय अधिकारी ने बताया कि यह मंच एआई-सक्षम शिक्षा के लिए रणनीतिक साझेदारियां विकसित करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें यह भी चर्चा होगी कि भारतीय शिक्षा प्रणाली एआई को अपनाने के लिए कितनी तैयार है, इसे बड़े स्तर पर कैसे लागू किया जा सकता है और कौन-से नए समाधान छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय शिक्षा व्यवस्था पहले ही बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में यह कॉन्क्लेव नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत को एक साथ लाकर यह तय करने का मंच बनेगा कि एआई का इस्तेमाल किस तरह जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समावेशी सोच के साथ किया जाए। लक्ष्य यह है कि तकनीक का फायदा सिर्फ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि देशभर में सीखने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।
यह कॉन्क्लेव 16 से 20 फरवरी के बीच दिल्ली में होने वाले बड़े इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले आयोजित किया जा रहा है। इस समिट में दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। इसमें NVIDIA के सीईओ जेनसन हुआंग, OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन, Google के सीईओ सुंदर पिचाई, Anthropic के सीईओ डारियो अमोडेई और Qualcomm के सीईओ क्रिस्टियानो एमोन जैसे वैश्विक तकनीकी नेता भाग ले सकते हैं।
कुल मिलाकर, ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026’ को शिक्षा और तकनीक के संगम की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भारत की शिक्षा प्रणाली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




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