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एस्ट्रोनॉट कैसे बनें: पढ़ाई, ट्रेनिंग और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी

एस्ट्रोनॉट कैसे बनें: पढ़ाई, ट्रेनिंग और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी

एस्ट्रोनॉट कैसे बनें: पढ़ाई, ट्रेनिंग और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी

अंतरिक्ष में जाने का सपना आज भी लाखों युवाओं को रोमांचित करता है। चांद और मंगल मिशनों की खबरों के बीच एस्ट्रोनॉट (Astronaut) बनना कई छात्रों के लिए बड़ा करियर लक्ष्य है। लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। इसके लिए मजबूत पढ़ाई, बेहतरीन शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन और लंबी ट्रेनिंग की जरूरत होती है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एस्ट्रोनॉट (Astronaut) बनने के लिए कोई अलग “Astronaut डिग्री” नहीं होती। इसके बजाय साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM विषयों में मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि जरूरी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और दुनिया की अन्य स्पेस एजेंसियों के मानकों के अनुसार इंजीनियरिंग, फिजिक्स, गणित, एयरोस्पेस, मैकेनिकल या संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा इस दिशा में पहला कदम मानी जाती है।

भारत में इस क्षेत्र में पढ़ाई के लिए Indian Institute of Space Science and Technology (IIST), तिरुवनंतपुरम एक प्रमुख संस्थान है। यह संस्थान ISRO के अधीन काम करता है और यहां एयरोस्पेस इंजीनियरिंग तथा स्पेस साइंस से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं। यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों को ISRO में काम करने के अवसर मिलते हैं, हालांकि एस्ट्रोनॉट (Astronaut) चयन की प्रक्रिया अलग और बेहद प्रतिस्पर्धी होती है। इसके अलावा IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर जैसे संस्थानों में एयरोस्पेस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के कोर्स उपलब्ध हैं, जो स्पेस सेक्टर में करियर के लिए उपयोगी हैं।

सिर्फ डिग्री ही काफी नहीं होती। उम्मीदवार को बेहतरीन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कसौटी पर भी खरा उतरना होता है। एस्ट्रोनॉट (Astronaut) चयन प्रक्रिया में मेडिकल टेस्ट, मनोवैज्ञानिक परीक्षण और कठोर शारीरिक प्रशिक्षण शामिल होते हैं। पायलटिंग अनुभव, रिसर्च बैकग्राउंड या रक्षा सेवाओं का अनुभव भी कई बार फायदेमंद साबित होता है। भारत में गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों को भारतीय वायु सेना से चुना गया था और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

सैलरी की बात करें तो यह देश, स्पेस एजेंसी और अनुभव पर निर्भर करती है। भारत में यदि किसी उम्मीदवार का चयन ISRO के माध्यम से होता है, तो उन्हें सरकारी वेतनमान के तहत भुगतान किया जाता है। शुरुआती स्तर पर वेतन लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये प्रति माह के आसपास हो सकता है। मिशन और अनुभव बढ़ने के साथ विभिन्न भत्ते जुड़ते हैं, जिससे कुल मासिक आय 2.5 लाख से 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। वरिष्ठ स्तर पर वार्षिक आय 30 से 40 लाख रुपये तक मानी जाती है, हालांकि यह मिशन और जिम्मेदारियों पर निर्भर करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एस्ट्रोनॉट (Astronaut) बनने का सपना देखने वाले छात्रों को स्कूल स्तर से ही गणित और विज्ञान पर मजबूत पकड़ बनानी चाहिए। इसके बाद इंजीनियरिंग या साइंस में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई, रिसर्च या तकनीकी अनुभव और अनुशासित जीवनशैली इस दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।

अंतरिक्ष तक पहुंचने का सफर लंबा जरूर है, लेकिन सही दिशा, लगातार मेहनत और धैर्य से यह सपना हकीकत बन सकता है।

एडइनबॉक्स टीम

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