
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए इंदौर के कक्षा 10 के छात्र—जिसे एक प्राइवेट इंस्टाग्राम अकाउंट पर मीम पोस्ट करने के कारण स्कूल से निष्कासित कर दिया गया था—को अगले सप्ताह से शुरू हो रही उसकी ICSE बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि बच्चे का पूरा शैक्षणिक वर्ष उसकी उन हरकतों के कारण बर्बाद नहीं किया जा सकता, जो उसने समाज से ही सीखी हैं।
जस्टिस बी. वी. नागरथना और जस्टिस उज्ज्वयल भूयां की बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यह बच्चा “समाज की ही एक तस्वीर है, जहां हर कोई एक-दूसरे को कोस रहा है”।
अदालत ने कहा कि स्कूल ने सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय छात्र को अलग कर दिया, जबकि वह अब घर पर ट्यूटरों की मदद से पढ़ाई कर रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरथना ने मौखिक टिप्पणी की, “आप (स्कूल) ने उसे सुधारा नहीं, बल्कि सीधे निष्कासित कर दिया।” उन्होंने कहा कि स्कूल की जिम्मेदारी थी कि वह बच्चे को सुधारने का प्रयास करता, लेकिन उसने उलटा कदम उठाया।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई (6 फरवरी) में जस्टिस भूयां ने कहा था कि मीम शायद उसी तरह की बातचीत को दर्शाते हैं जो उसके घर में होती है, और यदि समाज ऐसा है तो अदालत कुछ नहीं कर सकती।
जस्टिस नागरथना ने स्कूल के वकील से पूछा—“क्या आजकल किसी चीज़ के बारे में अच्छी बात कहते हुए किसी को देखा है?”
6 फरवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, ICSE और इंदौर स्थित Little Wonders Convent School से जवाब मांगा था।
याचिकाकर्ता के बेटे का बोर्ड परीक्षा हेतु पहले ही पंजीकरण हो चुका है। उसके वकील निपुण सक्सेना ने तर्क दिया कि यदि अगले सप्ताह उसे परीक्षा नहीं देने दी गई, तो उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने स्कूल की कार्रवाई को असंगत बताया।
स्कूल ने बच्चे को परीक्षा देने की अनुमति का विरोध किया और कहा कि छात्र को माफ नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे निष्कासित करना आवश्यक था। स्कूल ने यह भी कहा कि यदि छात्र को परीक्षा देने की अनुमति मिली तो स्कूल प्रबंधन का मनोबल गिरेगा।
सुनवाई के दौरान स्कूल के वकील ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता—जो पेशे से पत्रकार हैं—अपने मामले को मजबूत करने के लिए मीडिया रिपोर्टों का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन अदालत ने आगामी परीक्षा को देखते हुए निर्देश दिया कि ICSE बोर्ड छात्र को परीक्षा में बैठने दे और उसे प्रवेश पत्र जारी करे।
महत्वपूर्ण रूप से, अदालत ने विवाद की प्रकृति को देखते हुए स्कूल को यह स्वतंत्रता दी कि छात्र को अन्य बच्चों से अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाई जाए। साथ ही, स्कूल को निर्देश दिया कि आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा अब कराई जाए और उसकी रिपोर्ट ICSE को भेजी जाए।
मामला क्या है?
विवाद 4 फरवरी 2025 को शुरू हुआ, जब इंदौर के Little Wonders Convent School के कक्षा 9 के एक छात्र पर शिक्षकों के बारे में इंस्टाग्राम पर मीम पोस्ट करने का आरोप लगा।
याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह यादव का आरोप है कि इंस्टाग्राम अकाउंट का पता लगने के बाद एक कंप्यूटर टीचर ने बच्चे को थप्पड़ मारा और उनके घर पर बिना अनुमति “छापेमारी” तक की।
याचिका के अनुसार, शिक्षक ने बच्चे की मां के नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल फोन को अवैध रूप से एक्सेस किया, उसके प्राइवेट इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक किया और उसे अपने आधिकारिक क्रेडेंशियल से लिंक कर दिया। आरोप यह भी है कि स्कूल ने तीन छात्रों को तत्काल निष्कासन की धमकी देकर गलतबयानी वाले लिखित बयान देने पर मजबूर किया, जबकि लॉग रिकॉर्ड दिखाते थे कि अकाउंट का उपयोग कक्षा 11 के एक छात्र द्वारा किया गया था, जो याचिकाकर्ता के बेटे से दो कक्षाएं ऊपर है।
इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या था?
अक्टूबर 2025 के Madhya Pradesh High Court के फैसले—जिसने छात्र के निष्कासन को बरकरार रखा—में कहा गया कि बच्चे ने:
– एक शिक्षक की तस्वीर और धार्मिक संदर्भों के साथ “अत्यंत आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाले” मीम बनाए
– अभद्र भाषा और सांप्रदायिक संदर्भों का उपयोग किया
– एक अन्य शिक्षक की तस्वीर को कुत्ते के साथ जोड़कर “अपमानजनक समानता” दिखाने वाला पोस्ट किया
– एक महिला शिक्षक का मज़ाक उसके शारीरिक आकार के आधार पर उड़ाया
अदालत ने यह भी कहा कि यह “एक-दो पोस्ट नहीं बल्कि कई पोस्टों की श्रृंखला” थी, इसलिए इसे “इक्का-दुक्का घटना” नहीं माना जा सकता।
शिक्षा का अधिकार
स्कूल ने शीर्ष अदालत में यह तर्क भी दिया कि “अनुच्छेद 21-A किसी विशिष्ट निजी स्कूल में शिक्षा पाने का अधिकार नहीं देता।” हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई बाद में करने का संकेत देते हुए फिलहाल छात्र को परीक्षा देने की अनुमति दे दी है।




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