
केरल सरकार ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के शिक्षा मंत्री V. Sivankutty ने स्पष्ट कहा है कि विशेष शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर चल रहे कथित “फर्जी प्रचार” से लोगों को सावधान रहने की अपील भी की है।
मंत्री के मुताबिक, यह कार्रवाई Supreme Court of India के हालिया निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे दिव्यांग बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष शिक्षकों के पद सृजित करें और नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाएं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि रिक्त पदों की जानकारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए, साथ ही प्रमुख अखबारों में भी नोटिस प्रकाशित किए जाएं।
अदालत के निर्देश के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया Rehabilitation Council of India द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नियुक्त होने वाले शिक्षक आवश्यक प्रशिक्षण और प्रमाणन रखते हों।
तीन सदस्यीय समिति करेगी जांच
सरकार ने इस दिशा में एक तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग समिति गठित की है। इसमें राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, सामान्य शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय पुनर्वास परिषद का प्रतिनिधि शामिल है। समिति का काम पिछले करीब 20 वर्षों से संविदा या दैनिक वेतन पर कार्यरत विशेष शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता की जांच करना है।
जरूरत पड़ने पर योग्य शिक्षकों को आयु सीमा में छूट देकर नियमित किया जाएगा और उन्हें तय वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को स्थिरता मिलेगी और दिव्यांग छात्रों को निरंतर शैक्षणिक सहयोग मिलेगा।
2,707 शिक्षकों को मिल सकता है लाभ
फिलहाल ‘समग्र शिक्षा केरल’ कार्यक्रम के तहत 2,707 विशेष शिक्षक संविदा पर कार्यरत हैं। सरकार पात्र अभ्यर्थियों को नियमित करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इससे राज्य के सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षा सेवाएं और मजबूत होंगी।
हलफनामे को लेकर फैली गलतफहमी
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक सकारात्मक हलफनामा दाखिल कर प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगा है। मंत्री ने कहा कि कुछ लोग हलफनामे की गलत व्याख्या कर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, जो सही नहीं है। उनका कहना है कि सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शिक्षक-छात्र अनुपात और क्लस्टर प्रणाली
केंद्र के शिक्षा मंत्रालय के मानकों के अनुसार, राज्य प्राथमिक स्तर पर 10:1 और उच्च प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर पर 15:1 का शिक्षक-छात्र अनुपात सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा। साथ ही, विशेष शिक्षकों की बेहतर तैनाती के लिए ‘क्लस्टर प्रणाली’ लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके।
राज्य सरकार का कहना है कि दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। विशेष शिक्षकों की नियमित नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत और संवेदनशील बन सके।




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