
भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का क्षण है। मणिपुरी फिल्म Boong ने 79वें BAFTA Awards में ‘चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म’ श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि पाने वाली यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है।
मां की मुस्कान के लिए पिता की तलाश
‘बूंग’ की कहानी बेहद सरल लेकिन भावनात्मक है। यह मणिपुर की घाटी में रहने वाले एक बच्चे बूंग (गुगुन किपगेन) के इर्द-गिर्द घूमती है। बूंग अपनी मां को खुश देखना चाहता है, जो वर्षों से अकेले जीवन बिता रही है। वह तय करता है कि मां के लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा—अपने पिता को वापस लाना। इसी संकल्प के साथ वह पिता की तलाश में निकल पड़ता है। इस सफर में उसका एक दोस्त उसका साथ देता है।
यह यात्रा सिर्फ पिता की खोज नहीं, बल्कि उम्मीद, दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों की गहराई को समझने का सफर बन जाती है। फिल्म में बच्चे के नजरिए से संघर्ष, मासूमियत और भावनाओं को बेहद संवेदनशील ढंग से दिखाया गया है।
दमदार अभिनय और स्थानीय रंग
फिल्म में गुगुन किपगेन के साथ बाला हिजाम, नेमेतिया नगंगबाम, जेनी खुरई, हामोम सदानंद, एंगम सनामतम, विक्रम कोचर, थौदम ब्रजबिधु और मोधुबाला थौदम जैसे कलाकार नजर आते हैं। बाल कलाकारों का अभिनय स्वाभाविक है और कई दृश्य दर्शकों को भावुक कर देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच से मिली सराहना
फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 2024 में Toronto International Film Festival में हुआ था, जहां इसे दर्शकों से जबरदस्त सराहना और स्टैंडिंग ओवेशन मिला। बाद में इसे भारत में सितंबर 2025 में रिलीज किया गया।
इस फिल्म को अभिनेता और निर्माता Farhan Akhtar ने प्रोड्यूस किया है। उनके साथ विकेश भूटानी, एलन मैकएलेक्स, रितेश सिधवानी और शुजात सौदागर सह-निर्माता के रूप में जुड़े रहे।
‘बूंग’ की यह सफलता न केवल मणिपुरी सिनेमा, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि है। क्षेत्रीय भाषा में बनी एक संवेदनशील कहानी का वैश्विक मंच पर सम्मानित होना इस बात का संकेत है कि अच्छी कहानियां भाषा और सीमाओं से परे होती हैं।




Add comment