Edinbox Hindi
पूर्वांचल में खेती का नया प्रयोग: गोरखपुर यूनिवर्सिटी की रिसर्च किसानों के लिए उम्मीद की किरण

पूर्वांचल में खेती का नया प्रयोग: गोरखपुर यूनिवर्सिटी की रिसर्च किसानों के लिए उम्मीद की किरण

पूर्वांचल में खेती का नया प्रयोग: गोरखपुर यूनिवर्सिटी की रिसर्च किसानों के लिए उम्मीद की किरण

पूर्वांचल के किसानों के लिए एक नई उम्मीद गोरखपुर से निकल रही है। Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में ऐसी रिसर्च चल रही है, जो कम पानी वाले इलाकों में खेती की तस्वीर बदल सकती है। विभाग के प्रोफेसर अनुपम दुबे अपनी टीम के साथ ड्राई लैंड फार्मिंग और प्राकृतिक खेती पर काम कर रहे हैं। इसका लक्ष्य उन किसानों को सक्षम बनाना है, जो पानी की कमी के कारण हर सीजन कठिनाइयों का सामना करते हैं।

प्रोफेसर दुबे के नेतृत्व में विश्वविद्यालय परिसर में मेंथी, दाल और सरसों की खेती ड्राई लैंड मॉडल के तहत की जा रही है। इस पद्धति में न्यूनतम पानी का उपयोग कर अधिक उत्पादन लेने पर जोर है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह सूखे और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ा राहत विकल्प बन सकता है।

कछार क्षेत्र में पारंपरिक रूप से ‘काला नमक’ धान की खेती अधिक पानी वाली जमीन पर होती है, लेकिन रिसर्च टीम विपरीत परिस्थितियों वाले इलाकों के लिए नया मॉडल तैयार कर रही है—ऐसा मॉडल जो कम पानी में भी किसानों को अच्छी पैदावार दे सके। प्रोफेसर दुबे बताते हैं कि मिट्टी को इस बदलाव के अनुरूप ढलने में दो से तीन साल लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ड्राई लैंड खेती किसानों के लिए किफायती और टिकाऊ विकल्प सिद्ध होगी।

इस रिसर्च का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम प्राकृतिक खेती है। इसमें रासायनिक खादों पर निर्भरता कम कर जैविक तरीकों और प्राकृतिक संसाधनों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर है। इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि लंबे समय में मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। विश्वविद्यालय की टीम का मानना है कि प्राकृतिक खेती के साथ ड्राई लैंड मॉडल किसानों को कम खर्च में अधिक लाभ दे सकता है।

एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की यह पहल आने वाले समय में पूर्वांचल ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए नई राह खोलने की क्षमता रखती है। पानी की कमी वाले इलाकों में खेती को टिकाऊ और लागत-प्रभावी बनाने के लिए यह रिसर्च एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। यदि मॉडल जमीनी स्तर पर सफल होता है, तो यह कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत होगी।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed