
लंदन स्थित गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों से साफ है कि ब्रिटेन में वीज़ा बढ़ाने वाले विदेशी नागरिकों में भारतीय छात्र और कुशल कामगार सबसे आगे हैं। हाल के महीनों में मामूली गिरावट के बाद अब फिर से भारतीयों को जारी किए जाने वाले स्टडी और वर्क वीज़ा में बढ़ोतरी देखी गई है।
भारतीय छात्रों के स्टडी वीज़ा में बढ़त जारी
दिसंबर 2025 को समाप्त हुए एक साल में भारतीय छात्रों को 95,231 प्रायोजित स्टडी वीज़ा जारी किए गए। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 3% अधिक है। गृह मंत्रालय की मानें तो इस अवधि में विदेशी छात्रों को जारी किए गए कुल वीज़ा में से 23% भारतीयों के हिस्से आए, जो एक बार फिर उनकी बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।
कुशल कामगार वीज़ा में भी भारतीय सबसे आगे
वर्क वीज़ा के मोर्चे पर भी भारतीयों ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। दिसंबर 2025 तक जारी स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र के अनुबंधों में भारतीय नागरिक सबसे अधिक रहे—कुल 104,555। इनके बाद नाइजीरिया (88,461) और जिम्बाब्वे (28,914) का स्थान रहा।
कुल कुशल कामगार वीज़ा में भी भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। 2025 में 90,031 भारतीयों को यह वीज़ा मिला, जबकि पाकिस्तान (16,098) और नाइजीरिया (12,485) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
स्नातकों के लिए जारी वीज़ा में भी भारतीय अग्रणी हैं। इस श्रेणी में भारतीय नागरिकों को 90,153 वीज़ा मिले, जो नाइजीरिया (42,220) और पाकिस्तान (30,464) से कहीं अधिक है।
ग्रेजुएट रूट वीज़ा: बदलाव और प्रभाव
ग्रेजुएट रूट वीज़ा विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद ब्रिटेन में रहने और नौकरी तलाशने का अवसर देता है। वर्तमान नियमों के तहत यह अवधि दो साल है, लेकिन 1 जनवरी 2027 के बाद आवेदन करने वालों के लिए इसे 18 महीने कर दिया जाएगा।
हालांकि इस वीज़ा श्रेणी में पिछले साल 6% की गिरावट दर्ज की गई है। कारण—सरकार का आश्रितों की एंट्री पर कड़ा रुख। कई छात्रों को अब परिवार के सदस्यों को साथ लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कुशल कामगारों की कमी पर चेतावनी
ब्रिटेन के वर्क राइट्स सेंटर (WRC) ने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों की संख्या में गिरावट पर चिंता जताई है। चैरिटी की मुख्य कार्यकारी डॉ. डोरा-ओलिविया विकोल ने कहा कि प्रवासन को सीमित करने की कोशिश का सीधा असर पब्लिक सर्विसेज पर पड़ रहा है।
उनके अनुसार, विदेशी नर्सों की भर्ती में 93% की गिरावट ऐसे समय में हुई है जब अस्पतालों में 25,000 नर्सों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और दोहरी शिफ्टें आम होती जा रही हैं।
सख्त नीतियों के बीच प्रवासियों की चुनौतियां
डॉ. विकोल के मुताबिक, जो प्रवासी अभी भी ब्रिटेन में काम करने आ पा रहे हैं, वे बढ़ती जीवन-यापन लागत और लंबी सेटलमेंट प्रक्रिया से परेशान हैं। नियोक्ता-निर्भर वीज़ा होने के कारण कई कामगार शोषण का भी सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि संख्या कम करने की नीति के बजाय ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जो पब्लिक सर्विसेज की वास्तविक जरूरतों को समझे।
शरण मांगने वालों के आंकड़े और बदलता माहौल
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में ब्रिटेन में शरण मांगने वालों की संख्या 4% कम हुई है। हालांकि, अवैध रूप से छोटी नावों के ज़रिये आने वालों की संख्या में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शरण मांगने वालों में भारतीय सातवें स्थान पर रहे। पाकिस्तान, इरिट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, सूडान, सोमालिया, नाइजीरिया और वियतनाम शीर्ष 10 देशों में शामिल थे।
सरकार का कहना है कि ब्रेक्जिट के बाद आव्रजन प्रणाली में किए गए बदलावों के चलते 2021 से भारत सहित कई देशों के नागरिकों के वर्क और स्टडी वीज़ा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।




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