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बिहार में आधुनिक खेती का विस्तार: रंगीन शिमला मिर्च की इंडो-इजरायल तकनीक ने बढ़ाया किसानों का मुनाफ़ा

बिहार में आधुनिक खेती का विस्तार: रंगीन शिमला मिर्च की इंडो-इजरायल तकनीक ने बढ़ाया किसानों का मुनाफ़ा

बिहार में आधुनिक खेती का विस्तार: रंगीन शिमला मिर्च की इंडो-इजरायल तकनीक ने बढ़ाया किसानों का मुनाफ़ा

बिहार में खेती का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। परंपरागत तरीके छोड़कर किसान अब वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार भी कृषि को आधुनिक दिशा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी का परिणाम है नालंदा जिले के चंडी स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वेजिटेबल्स, जहां इंडो-इजरायल तकनीक से हाई-टेक सब्जियों की खेती की जा रही है। यह केंद्र न केवल आधुनिक खेती का मॉडल है, बल्कि यहां बीज से लेकर तैयार पौधे तक वैज्ञानिक तरीके से विकसित किए जा रहे हैं।

इन दिनों केंद्र में बिना बीज वाला बैंगन, चेरी टोमैटो, उन्नत किस्म के टमाटर और रंगीन शिमला मिर्च जैसी दर्जनों फसलें उगाई जा रही हैं। केंद्र के साइट इंचार्ज भूषण प्रसाद सिंह ने बताया कि यहां की खेती पूरी तरह पॉली हाउस और नियंत्रित वातावरण पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक सिखाकर आय बढ़ाना है।

रंगीन शिमला मिर्च की खेती किसानों के लिए बड़ा अवसर

रंगीन शिमला मिर्च—यानी पीली और लाल किस्म—बाजार में लगातार अच्छी मांग रखती है। भूषण प्रसाद सिंह कहते हैं कि चंडी स्थित यह केंद्र बिहार का दूसरा आधुनिक कृषि केंद्र है, जहां इंडो-इजरायल तकनीक को अपनाया गया है। सामान्य शिमला मिर्च जहां खेतों में 30–40 रुपये किलो बिकती है, वहीं रंगीन शिमला मिर्च की कीमत 80 से 150 रुपये किलो तक पहुंच जाती है। यही अंतर इसे किसानों के लिए बेहद लाभदायक बनाता है।

वे बताते हैं कि सामान्य शिमला मिर्च की फसल 4 महीने तक ही चल पाती है, जबकि पॉली हाउस में तैयार रंगीन शिमला मिर्च 8 महीने तक फलन देती है। यानी उत्पादन अवधि दोगुनी, और बाजार मूल्य भी लगभग दोगुना—स्पष्ट रूप से किसानों के लिए बेहतर कमाई का अवसर।

पॉली हाउस में खेती का एक और फायदा यह है कि पौधे तापमान के उतार-चढ़ाव, बारिश और हवा जैसे मौसमीय खतरों से सुरक्षित रहते हैं। फसल खराब होने का जोखिम बेहद कम रहता है। यही वजह है कि किसान जुलाई तक इसकी खेती जारी रख पाते हैं।

तकनीक से जुड़कर मजबूत होते किसान

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हर पौधे की निगरानी वैज्ञानिक तरीके से की जाती है। पौधों को तैयार करने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक हर चरण पर शोध किया जाता है। यहां अब तक करीब 30 से 35 हजार किसानों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से लगभग 35 प्रतिशत किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती कर रहे हैं।

भूषण प्रसाद सिंह के अनुसार, यदि किसान कम मेहनत में अधिक कमाई चाहते हैं, तो इस तकनीक से खेती उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। रंगीन शिमला मिर्च सहित कई हाई-वैल्यू सब्जियां किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं, बशर्ते बीज की गुणवत्ता और पौधों की देखभाल पर पूरा ध्यान दिया जाए।

आधुनिक खेती से नई उम्मीदें

चंडी का यह मॉडल बिहार में खेती के नए अध्याय की शुरुआत है। यहां की तकनीक किसानों को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि की बारीकियां भी सिखा रही है। सरकारी प्रयास, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और किसानों की बदलती सोच मिलकर बिहार में कृषि-क्रांति की राह तैयार कर रहे हैं।

यदि यह मॉडल तेजी से फैलता है, तो रंगीन शिमला मिर्च जैसी हाई-वैल्यू सब्जियां राज्य के हजारों किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकती हैं।

Asmita Sarkar

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