
IILM University के मनोविज्ञान विभाग ने छात्रों के लिए एक अनोखी और प्रेरक पहल ‘Earthen Psyche – Biophilia’ की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच मानसिक स्वास्थ्य और प्रकृति के गहरे संबंध को समझाने की दिशा में एक ताज़ा प्रयास है। इसका उद्देश्य छात्रों को यह बताना है कि हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के संपर्क में आने से तनावग्रस्त मन शांत, संतुलित और रचनात्मक बन सकता है।
इस आयोजन में छात्रों ने प्रकृति के साथ रचनात्मक प्रयोग किए। पत्तों से बुनाई (लीफ वीविंग) और मिट्टी से मॉडलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने प्राकृतिक सामग्री का उपयोग कर कला का सृजन किया। कार्यक्रम की खास झलक सामुदायिक वृक्षारोपण अभियान रही, जिसमें 100 पौधे लगाए गए। इससे पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही प्रकृति फोटोग्राफी प्रतियोगिता ने तकनीक और प्राकृतिक सौंदर्य का बेहतरीन मेल प्रस्तुत किया।
इन गतिविधियों ने छात्रों में खुशी, टीमवर्क और उद्देश्य की भावना को मजबूत किया। साथ ही, रोजमर्रा की जिंदगी में सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) के महत्व को भी समझाया।
भारतीय छात्रों के लिए ऐसे कार्यक्रम कई तरह से लाभकारी साबित हो सकते हैं। शोध बताते हैं कि प्रकृति के संपर्क में रहने से तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर 20-30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। परीक्षा के दबाव से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए बगीचे में समय बिताना या हरियाली के बीच टहलना मानसिक शांति दे सकता है। बायोफिलिया, यानी प्रकृति के प्रति प्रेम, रचनात्मकता और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है। मिट्टी से मॉडलिंग जैसी गतिविधियां समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करती हैं, जो मनोविज्ञान, डिजाइन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों के छात्रों के लिए उपयोगी है।
तेजी से शहरीकरण और बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में प्रकृति के साथ जुड़ाव भावनात्मक मजबूती भी देता है। यह अकेलेपन की भावना को कम करता है और सकारात्मक मनोदशा को बढ़ावा देता है, जो प्रतिस्पर्धी करियर के इस युग में बेहद जरूरी है। वृक्षारोपण जैसे प्रयास छात्रों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं और उन्हें भविष्य के ग्रीन जॉब्स के लिए तैयार करते हैं। साथ ही, यह पहल नई शिक्षा नीति 2020 की समग्र शिक्षा की भावना के अनुरूप भी है।
अभिभावक और शिक्षक ऐसे प्रयासों की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि इससे छात्र सीखने के साथ-साथ मानसिक रूप से स्वस्थ और खुश भी रहते हैं। ‘Earthen Psyche – Biophilia’ सच मायनों में दिमाग और धरती दोनों के संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इस अभिनव पहल के लिए IILM के मनोविज्ञान विभाग को बधाई दी जानी चाहिए।




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