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प्रिसिजन फार्मिंग: बुंदेलखंड के किसानों के लिए समृद्धि का नया रास्ता

प्रिसिजन फार्मिंग: बुंदेलखंड के किसानों के लिए समृद्धि का नया रास्ता

प्रिसिजन फार्मिंग: बुंदेलखंड के किसानों के लिए समृद्धि का नया रास्ता

बुंदेलखंड में एक पुरानी कहावत है—“खेती किसान को पैसे कमाने नहीं देती और भूखा सोने भी नहीं देती।” यह बात आज भी खेतों में मेहनत कर रहे किसानों की स्थिति बयान करती है। सालभर की मेहनत से किसान परिवार का खर्च तो निकल आता है, लेकिन किसी बीमारी या बड़े घरेलू कार्यक्रम में उन्हें कर्ज का सहारा लेना पड़ता है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर प्रिसिजन फार्मिंग अपनाएं, तो कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना संभव है। यह तकनीक उनकी आर्थिक स्थिरता और बेहतर उत्पादन का नया विकल्प बनकर उभर रही है।

क्या है प्रिसिजन फार्मिंग?

प्रिसिजन फार्मिंग यानी सटीक खेती, आधुनिक तकनीक पर आधारित खेती का तरीका है। इसमें GPS, ड्रोन, सेंसर, IoT और डेटा एनालिसिस की मदद से हर फसल की जरूरत के अनुसार सही समय, सही जगह और सही मात्रा में पानी, खाद, उर्वरक और कीटनाशक दिया जाता है। इससे लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है।

गंजबासौदा के एग्रीकल्चर स्कूल की छात्रा वैष्णवी शर्मा बताती हैं कि इस खेती में AI, कंप्यूटर, GPS, सॉइल सेंसर और GIS जैसी तकनीकों का उपयोग होता है, जो किसानों को पारंपरिक खेती में होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा सकता है।

खेत की निगरानी में GPS और ड्रोन की भूमिका

वैष्णवी के अनुसार GPS खेत की भौगोलिक स्थिति समझने में बड़ी मदद करता है। इससे खेत का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार किया जा सकता है और मोबाइल के माध्यम से भी ट्रैकिंग की जा सकती है।

दूसरी ओर, ड्रोन अब खेती की सबसे बड़ी जरूरत बनते जा रहे हैं। खेत में जब फसल बढ़ जाती है तो पैरों के दबाव से पौधे टूटने का खतरा रहता है। वहीं, फसल कटने के समय बालियां टूटकर गिरने से नुकसान होता है। ड्रोन के जरिए किसान आसानी से-कीटनाशक का छिड़काव, फसल की सेहत की जांच, खेत की रियल-टाइम मॉनिटरिंग-सटीक और बिना किसी नुकसान के कर सकते हैं।

मिट्टी की बिगड़ती हालत और सेंसर की जरूरत

फर्टिलाइज़र के लगातार उपयोग से पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की नमी और पोषण स्तर पर लगातार नजर रखना अब अनिवार्य हो गया है।

सॉइल सेंसर लगाने से किसान को तुरंत यह जानकारी मिलती रहती है कि—

– मिट्टी में नमी कितनी है

– कौन-कौन से पोषक तत्व कम हो रहे हैं

– खेत का तापमान क्या है

इन जानकारियों के आधार पर किसान सिंचाई, उर्वरक और खाद का सही समय पर और सही मात्रा में उपयोग कर सकते हैं।

IoT और डेटा एनालिसिस कैसे बदल रहे हैं खेती का तरीका

GPS, सेंसर और ड्रोन के साथ IoT (Internet of Things) और डेटा एनालिसिस खेत से जुड़े सभी आंकड़ों को किसान के मोबाइल या कंप्यूटर तक भेजते हैं। इस डेटा के आधार पर किसान यह तय कर पाते हैं कि—

– फर्टिलाइज़र कब और कितना देना है

– कीटनाशक का सही समय क्या है

– सिंचाई किस स्तर पर करनी है

पहले साल उपकरण खरीदना किसानों को महंगा लग सकता है, लेकिन इसके बाद हर साल पानी, उर्वरक और कीटनाशक की बचत होती है। साथ ही उत्पादन बढ़ता है, जिससे होने वाला मुनाफा निवेश की भरपाई जल्द कर देता है।

प्रिसिजन फार्मिंग के फायदे

– मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है

– पर्यावरण प्रदूषण कम होता है

– पानी और संसाधनों की बर्बादी रुकती है

– लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है

– कीटनाशक का कम उपयोग होने से स्वास्थ्य जोखिम भी घटता है

बुंदेलखंड सहित देशभर के किसानों के लिए प्रिसिजन फार्मिंग एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। यह तकनीक न सिर्फ उत्पादन बढ़ाती है बल्कि खेती को टिकाऊ, सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी मदद करती है। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर तकनीक अपनाना अब समय की मांग है। अगर किसान इसे अपनाते हैं, तो आगे आने वाले वर्षों में उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।

Asmita Sarkar

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