Edinbox Hindi
ग्रीन इकोनॉमी का बढ़ता दौर: भारत में साफ ऊर्जा से कैसे बदल रहा है रोजगार का भविष्य

ग्रीन इकोनॉमी का बढ़ता दौर: भारत में साफ ऊर्जा से कैसे बदल रहा है रोजगार का भविष्य

ग्रीन इकोनॉमी का बढ़ता दौर: भारत में साफ ऊर्जा से कैसे बदल रहा है रोजगार का भविष्य

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की गंभीर चुनौतियों के बीच दुनिया तेजी से ग्रीन इकोनॉमी की ओर बढ़ रही है। ऐसे काम जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के बजाय उसकी सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा दें, उन्हें आज ग्रीन जॉब्स कहा जाता है। भारत भी इसी दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है।

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय किया है, जिसमें सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर मुख्य भूमिका निभाने वाले हैं। यह बदलाव केवल ऊर्जा के स्तर पर ही नहीं, बल्कि रोजगार के बड़े अवसरों की शुरुआत भी कर रहा है।

एक हालिया रिपोर्ट में Council on Energy, Environment and Water (CEEW) ने अनुमान लगाया है कि 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में लगभग 34 लाख नई नौकरियाँ पैदा हो सकती हैं। इनमें सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, विंड टरबाइन ऑपरेशन और ऊर्जा दक्षता से जुड़े काम सबसे आगे होंगे।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भी बड़ी संख्या में रोजगार ला सकता है, जिसमें 6 लाख से अधिक स्किल्ड जॉब्स की संभावना जताई गई है।

इसी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर भारत में रोजगार का सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र बन रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक EV इकोसिस्टम में 1 करोड़ डायरेक्ट और 5 करोड़ इंडायरेक्ट नौकरियाँ बनने की संभावना है। इन आंकड़ों से साफ है कि ग्रीन सेक्टर आने वाले दशक का मजबूत रोजगार इंजन बनने जा रहा है।

ग्रीन जॉब्स में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?

ग्रीन जॉब्स केवल एक तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई क्षेत्रों को जोड़ते हैं। सोलर पैनल इंस्टॉलर, विंड टरबाइन टेक्नीशियन, EV सर्विस इंजीनियर, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन, पर्यावरण सलाहकार, सस्टेनेबिलिटी मैनेजर, वेस्ट मैनेजमेंट विशेषज्ञ और ग्रीन बिल्डिंग डिजाइनर जैसे प्रोफाइल तेजी से मांग में हैं।

12वीं के बाद कौन-सा रास्ता चुनें?

अगर कोई छात्र 12वीं (साइंस/मैथ्स) के बाद इस क्षेत्र में आना चाहता है, तो रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी, सोलर टेक्निशियन ट्रेनिंग और इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल डिप्लोमा जैसे विकल्प उपलब्ध हैं।

ITI में इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन और सोलर पैनल इंस्टॉलेशन ट्रेड काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

ग्रेजुएशन के बाद भी कई मजबूत विकल्प मौजूद हैं—

बीटेक/बीई इन इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल या एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग, बीएससी एनवायरमेंटल साइंस, एमटेक रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट में MBA।

कई विश्वविद्यालय शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स भी चला रहे हैं, जो इस क्षेत्र में तुरंत स्किल देने का काम करते हैं।

कितनी मिल सकती है सैलरी?

एंट्री लेवल पर सोलर या EV सेक्टर में 2.5 से 4 लाख रुपये वार्षिक पैकेज मिल सकता है। इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट बैकग्राउंड वाले युवाओं के लिए यह पैकेज 6 से 12 लाख रुपये तक पहुँच सकता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वेतन में तेजी से इजाफा होता है।

क्यों माना जा रहा है इसे ‘फ्यूचर-प्रूफ’ सेक्टर?

दुनिया भर में क्लीन एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है। भारत सरकार की नीतियाँ, विदेशी निवेश और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इस क्षेत्र को और मजबूत बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10–15 वर्षों में ग्रीन सेक्टर का दायरा कई गुना बढ़ने वाला है। ऐसे में सही दिशा में पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट करने वाले युवाओं के लिए यह समय एक बड़ा अवसर है।

ग्रीन इकोनॉमी न सिर्फ पर्यावरण को संभालने का रास्ता है, बल्कि युवाओं के लिए भविष्य सुरक्षित करने वाला स्थिर और तेज़ी से बढ़ता करियर विकल्प भी बन चुका है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed