
पिछले कुछ वर्षों में तकनीक भारतीय स्कूल शिक्षा के किनारे से हटकर उसके केंद्र में आ चुकी है। नई शिक्षा नीति National Education Policy 2020 (NEP 2020) ने इस बदलाव को स्पष्ट दिशा दी। डिजिटल साक्षरता और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर जोर देते हुए नीति ने संकेत दिया कि तकनीक अब केवल कंप्यूटर पीरियड या आईसीटी लैब तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह तय करेगी कि विषय कैसे पढ़ाए जाएंगे और छात्र कैसे अभ्यास करेंगे।
इस दिशा में पहला बड़ा कदम वरिष्ठ कक्षाओं में दिखा, जब Central Board of Secondary Education (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्किल विषय के रूप में शुरू किया। छात्रों को इसे औपचारिक रूप से चुनने, एआई की बुनियादी समझ विकसित करने और प्रोजेक्ट आधारित सीखने का अवसर मिला। अब यह बदलाव और नीचे की कक्षाओं तक ले जाने की तैयारी है।
सरकार का लक्ष्य है कि कक्षा 3 से ही एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू की जाए। यानी अब यह केवल कोडिंग जानने वाले किशोरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्राथमिक स्तर से ही इसकी शुरुआत होगी। हालांकि किसी भी पाठ्यक्रम सुधार की असली सफलता शिक्षकों पर निर्भर करती है, क्योंकि वे ही कक्षा में बदलाव को लागू करते हैं।
क्या शिक्षक एआई के लिए तैयार हैं?
एआई को रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बनाने के लिए सबसे जरूरी है प्रशिक्षित शिक्षक। सवाल यही है कि क्या भारतीय कक्षाओं के शिक्षक इस बदलाव के लिए तैयार हैं?
2025 में सेंटर फॉर टीचर एक्रेडिटेशन (CENTA) के एक राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार लगभग 75 प्रतिशत शिक्षकों ने बताया कि वे एआई संसाधनों का सक्रिय उपयोग कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक उपयोग लेसन प्लानिंग के लिए होता है। करीब 26 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे कक्षा गतिविधियों के विचार तैयार करने के लिए एआई की मदद लेते हैं।
हालांकि सर्वे में एक अंतर भी सामने आया। जहां 67 प्रतिशत शिक्षकों ने अपनी एआई विशेषज्ञता को 10 में से 6 या उससे अधिक अंक दिए और औसत स्व-मूल्यांकन 7 रहा, वहीं केवल 57 प्रतिशत शिक्षक एआई से जुड़े एक बुनियादी गलतफहमी वाले प्रश्न का सही उत्तर दे सके। इससे स्पष्ट है कि आत्मविश्वास और वास्तविक समझ के बीच अभी भी अंतर मौजूद है।
माइक्रोसॉफ्ट की पहल
इसी पृष्ठभूमि में Microsoft ने भारत में ‘Elevate for Educators’ कार्यक्रम शुरू किया है। एशिया में यह पहल सबसे पहले भारत में शुरू हुई है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख शिक्षकों को एआई कौशल में प्रशिक्षित करना है। इसकी शुरुआत दिल्ली के सभी 75 CM SHRI स्कूलों से की गई है, जिससे दिल्ली पहला पूर्ण कार्यान्वयन केंद्र बन गया है।
भारत में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में करीब एक करोड़ शिक्षक हैं। यदि लक्ष्य पूरा होता है तो अगले पांच वर्षों में हर पांच में से एक शिक्षक इस कार्यक्रम का हिस्सा होगा। माइक्रोसॉफ्ट की योजना है कि यह पहल देश के दो लाख तक स्कूलों और संस्थानों तक पहुंचे।
कार्यक्रम की संरचना
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार ‘Elevate for Educators’ तीन मुख्य स्तंभों—क्रेडेंशियल, कम्युनिटी और कैपेसिटी—पर आधारित है।
यह पहल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षकों के पेशेवर विकास पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम है। क्रेडेंशियल के तहत एआई से जुड़े नए प्रमाणपत्र शुरू किए जाएंगे, जो राष्ट्रीय शिक्षा मानकों और एआई साक्षरता दिशा-निर्देशों के अनुरूप होंगे। इसका उद्देश्य शिक्षकों को एआई टूल्स की बेहतर समझ देना है, ताकि वे कक्षा में छात्र सहभागिता बढ़ा सकें। हालांकि प्रशिक्षण अवधि, मूल्यांकन पद्धति और परिणाम मापने के मानकों को लेकर विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
कम्युनिटी स्तंभ के तहत 20 लाख शिक्षकों के लिए साझा मंच तैयार किया जाएगा, जहां वे अनुभव साझा कर सकेंगे और एक-दूसरे से सीख सकेंगे। इसका मकसद केवल एक बार का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सहयोग प्रणाली बनाना है।
तीसरे स्तंभ कैपेसिटी के तहत 25 हजार संस्थानों में एआई एंबेसडर, एजुकेटर अकादमी, एआई प्रोडक्टिविटी लैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना है, ताकि बड़े स्तर पर कक्षा उपयोग से पहले ‘एआई रेडीनेस’ सुनिश्चित की जा सके।
दिल्ली के स्कूलों में एआई का प्रयोग
दिल्ली के CM SHRI स्कूलों में एआई का उपयोग शिक्षकों की तैयारी प्रक्रिया से शुरू हो चुका है। रोहिणी सेक्टर-11 स्थित एक स्कूल की शिक्षिका फातिमा ने बताया कि उन्होंने कक्षा 11 की बायोलॉजी की तैयारी के लिए Microsoft Copilot का इस्तेमाल किया। इस टूल की मदद से उन्होंने पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और संरचित प्रेजेंटेशन जल्दी तैयार की, जिससे छात्रों को जटिल अवधारणाएं आसान चरणों में समझाई जा सकीं।
द्वारका के एक CM SHRI स्कूल की शिक्षिका मधुबाला ने बताया कि उन्होंने ऑटिज्म से ग्रसित एक छात्र की मदद के लिए Copilot से कस्टमाइज्ड मोटिवेशनल स्टिकर और सरल फीडबैक टूल तैयार किए।
भाषा शिक्षण में भी एआई का उपयोग बढ़ रहा है। रोहिणी की शिक्षिका प्रीति शर्मा के अनुसार, अंग्रेजी के अमूर्त विचारों को सरल बनाने और छात्रों को तर्क, अनुमान और भविष्यवाणी जैसी कौशल की ओर प्रेरित करने में एआई सहायक साबित हो रहा है।
पैमाना बनाम गहराई
20 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना प्रभावशाली लगती है, लेकिन भारत में शिक्षक प्रशिक्षण की चुनौती केवल संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता और निरंतरता भी है। कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र तो मिल जाते हैं, पर लंबे समय तक मार्गदर्शन की कमी अक्सर देखी गई है।
इसके अलावा जिम्मेदार एआई उपयोग की स्पष्ट परिभाषा, गलत सूचना से बचाव, नैतिक और शैक्षणिक पहलुओं की समझ जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है असमान पहुंच। शहरी स्कूल जहां बेहतर संसाधनों से लैस हैं, वहां एआई अपनाना अपेक्षाकृत आसान है। वहीं ग्रामीण स्कूलों में जहां बुनियादी ढांचा अभी भी चुनौती है, वहां एआई प्रशिक्षण और उपयोग कठिन हो सकता है। यदि शिक्षक तैयारी में असमानता रही, तो एआई उन सीखने के अंतरालों को और बढ़ा सकता है, जिन्हें कम करने का दावा किया जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बड़े पैमाने पर की गई यह पहल जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है, खासकर संसाधन सीमित स्कूलों के लिए।




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