
केरल में उच्च शिक्षा से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। Rajendra Vishwanath Arlekar ने Sree Sankaracharya University of Sanskrit, कलाडी की कुलपति प्रोफेसर के. के. गीताकुमारी को उनके पद से हटा दिया है। राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) भी होते हैं और उसी अधिकार के तहत यह फैसला लिया गया है।
राजभवन की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। हालांकि नोटिफिकेशन में कुलपति को पद से हटाने के पीछे का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। इस निर्णय के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज को लेकर नई व्यवस्था भी की गई है।
राज्यपाल के आदेश के अनुसार Sija Thomas को APJ Abdul Kalam Technological University की कुलपति होने के साथ-साथ श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी अगले आदेश तक उनके पास रहेगी।
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया की ओर से विश्वविद्यालय के प्रवक्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिल सका।
छात्र के परिणाम को लेकर उठा था विवाद
कुलपति को हटाए जाने से पहले विश्वविद्यालय से जुड़ा एक विवाद भी चर्चा में आया था। पिछले महीने राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की सिंडिकेट द्वारा लिए गए एक फैसले पर रोक लगा दी थी। यह मामला एक छात्र के शैक्षणिक परिणाम से जुड़ा था।
जानकारी के अनुसार ए. कलेश नाम का एक छात्र वर्ष 2005 में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) परीक्षा में असफल हो गया था। इसके बावजूद बाद में उसे मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (MFA) कार्यक्रम में प्रवेश मिल गया और उसने वर्ष 2023 में यह कोर्स पूरा कर लिया।
इसके बाद विश्वविद्यालय की सिंडिकेट ने विशेष मामले के तौर पर उस छात्र को बीएफए की डिग्री देने का निर्णय लिया था। बताया गया कि यह छात्र छात्र संगठन Students’ Federation of India (SFI) से जुड़ा रहा है।
हालांकि इस फैसले का विरोध भी हुआ। Save University Campaign Committee नामक संगठन ने इस मामले को लेकर सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई और विश्वविद्यालय के फैसले पर सवाल उठाए।
नियुक्तियों को लेकर भी लगे आरोप
सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी ने कुलपति के खिलाफ राज्यपाल को एक और शिकायत भी भेजी थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुलपति ने सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति पर लगी रोक के आदेश का उल्लंघन किया और विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षकों की भर्ती करने का फैसला लिया।
इन आरोपों के बाद राज्यपाल ने पिछले महीने विश्वविद्यालय में फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
इसके अलावा कुलपति पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के नियमों का पालन किए बिना परिसर की जमीन क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए आवंटित कर दी। इस मुद्दे को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना हुई थी।
इन सभी विवादों के बीच राज्यपाल द्वारा कुलपति को पद से हटाने का फैसला लिया गया है। हालांकि राजभवन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस निर्णय के पीछे आधिकारिक कारण क्या है। शिक्षा जगत में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता आने की संभावना जताई जा रही है।




Add comment