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NCERT ने जारी किया कक्षा 9 के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम, अब पढ़ाई में रटने से ज्यादा समझ पर जोर

NCERT ने जारी किया कक्षा 9 के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम, अब पढ़ाई में रटने से ज्यादा समझ पर जोर

NCERT ने जारी किया कक्षा 9 के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम, अब पढ़ाई में रटने से ज्यादा समझ पर जोर

देश की स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। नई शिक्षा नीति के बाद अब पाठ्यक्रम को भी उसी दिशा में ढाला जा रहा है, जहां केवल किताबें याद करना ही पढ़ाई का मकसद न हो, बल्कि छात्र चीजों को समझें, सवाल पूछें और प्रयोग करके सीखें। इसी क्रम में National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 9 के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम जारी किया है, जिसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू करने की तैयारी है।

यह बदलाव National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework 2023 के तहत किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है। नए पाठ्यक्रम में कौशल आधारित शिक्षा, व्यावहारिक समझ और भारतीय ज्ञान परंपरा को अधिक महत्व दिया गया है।

माध्यमिक स्तर में कक्षा 9 और 10 दोनों शामिल हैं, लेकिन फिलहाल विस्तृत मसौदा मुख्य रूप से कक्षा 9 के लिए जारी किया गया है। इसमें कई विषयों के अध्यायों को नया रूप दिया गया है, कुछ पुराने अध्याय हटाए गए हैं और कुछ नए विषय जोड़े गए हैं, ताकि पढ़ाई ज्यादा प्रासंगिक और उपयोगी बन सके।

विज्ञान की पढ़ाई का तरीका बदलेगा

कक्षा 9 के विज्ञान पाठ्यक्रम में सबसे बड़ा बदलाव इसके पढ़ाने के तरीके में देखने को मिलेगा। नए ढांचे में विज्ञान को सिर्फ तथ्यों और परिभाषाओं का संग्रह नहीं माना गया है, बल्कि इसे प्रकृति और भौतिक दुनिया को समझने की एक प्रक्रिया के रूप में पेश किया गया है।

पाठ्यक्रम के मुताबिक अब छात्रों को अवलोकन करना, सवाल पूछना, परिकल्पना बनाना, प्रयोग करना और मिले हुए प्रमाणों का विश्लेषण करना सिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी केवल उत्तर याद न करें, बल्कि यह समझें कि किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष तक पहुंचा कैसे जाता है।

इस दृष्टिकोण से छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और प्रमाणों के आधार पर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की कोशिश की जाएगी।

विज्ञान में ‘पृथ्वी प्रणाली’ की नई अवधारणा

संशोधित पाठ्यक्रम में विज्ञान को चार प्रमुख हिस्सों—भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान—के दृष्टिकोण से व्यवस्थित किया गया है। कुल मिलाकर पाठ्यक्रम में 11 अध्याय रखे गए हैं।

भौतिकी में कुछ बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के लिए गुरुत्वाकर्षण वाला अध्याय हटाया गया है, जबकि ‘वर्क एंड एनर्जी’ को विस्तार देकर “वर्क, एनर्जी एंड सिंपल मशीनें” बनाया गया है। इसमें पुली, लीवर और तिरछे तल जैसे व्यावहारिक विषय जोड़े गए हैं, जिससे छात्र रोजमर्रा की जिंदगी में इन सिद्धांतों को समझ सकें।

रसायन विज्ञान में ‘मैटर इन आवर सराउंडिंग्स’ को हटाकर ‘एटम्स एंड मॉलिक्यूल्स’ और ‘स्ट्रक्चर ऑफ एटम’ पर अधिक ध्यान दिया गया है। वहीं जीवविज्ञान में ‘रिप्रोडक्शन’ और ‘डाइवर्सिटी’ नाम से दो नए अध्याय जोड़े गए हैं, जबकि ‘इम्प्रूवमेंट इन फूड रिसोर्सेज’ को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।

इसके साथ ही एक नया खंड “अर्थ ऐज ए सिस्टम: एनर्जी, मैटर एंड लाइफ” भी शामिल किया गया है, जिसमें पृथ्वी, पर्यावरण और जीवों के बीच संबंधों को समझाने पर जोर दिया जाएगा।

एकीकृत और बहु-विषयक शिक्षा पर जोर

नए पाठ्यक्रम की एक अहम विशेषता यह है कि विज्ञान को अन्य विषयों से जोड़कर पढ़ाने की कोशिश की गई है। इसमें गणित, कम्प्यूटेशनल साइंस और सामाजिक विज्ञान के कुछ पहलुओं को भी जोड़ा गया है, ताकि छात्र विज्ञान की व्यापक समझ विकसित कर सकें।

संशोधित ढांचे के अनुसार कक्षा 9 और 10 में विज्ञान को एकीकृत विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान को मिलाकर पढ़ाया जाएगा। इसके बाद कक्षा 11 और 12 में इन विषयों को अलग-अलग विषयों के रूप में पढ़ाया जाएगा, जिससे छात्र किसी एक क्षेत्र में गहराई से अध्ययन कर सकें।

पाठ्यक्रम यह भी स्पष्ट करता है कि विज्ञान स्थिर नहीं है। नए शोध और प्रमाण सामने आने पर वैज्ञानिक सिद्धांतों और अवधारणाओं में बदलाव हो सकता है। इसलिए छात्रों को तार्किक सोच, प्रयोग और साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया को समझाने पर जोर दिया गया है।

भारतीय ज्ञान और वैज्ञानिक परंपरा पर भी ध्यान

नई रूपरेखा में भारत के वैज्ञानिक योगदान और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी जगह दी गई है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि वैश्विक विज्ञान के विकास में भारत की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

पाठ्यक्रम में विज्ञान शिक्षा को जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं, सतत विकास और सामाजिक समानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से भी जोड़ने की बात कही गई है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पाठ्यक्रम को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह छात्रों को सिर्फ परीक्षा के लिए पढ़ने वाला विद्यार्थी नहीं, बल्कि जिज्ञासु और शोध-उन्मुख सीखने वाला नागरिक बनाने में मदद कर सकता है। इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

Asmita Sarkar

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