
देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली Joint Entrance Examination (Advanced) यानी जेईई एडवांस परीक्षा के स्वरूप में बड़ा बदलाव करने की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव है कि परीक्षा में एक नया एप्टीट्यूड आधारित टेस्ट फॉर्मेट लागू किया जाए, जिसमें छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार अलग-अलग स्तर के प्रश्न पूछे जाएंगे। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में जेईई एडवांस पूरी तरह इसी मॉडल पर आधारित हो सकती है।
नई व्यवस्था के तहत परीक्षा को अधिक लचीला और छात्र-अनुकूल बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रस्तावित मॉडल में अगर कोई छात्र किसी प्रश्न को हल नहीं कर पाता है, तो अगला प्रश्न अपेक्षाकृत आसान दिया जा सकता है। वहीं यदि छात्र लगातार सही उत्तर देता है, तो सिस्टम उसके सामने थोड़े अधिक कठिन प्रश्न रखेगा। इस तरह परीक्षा प्रत्येक छात्र की वास्तविक क्षमता को बेहतर ढंग से परखने की कोशिश करेगी।
परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की पहल
आईआईटी की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था IIT Council ने हाल की बैठकों में परीक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए इस मॉडल पर विचार शुरू किया है। इस पहल में अहम भूमिका Indian Institute of Technology Kanpur निभा रहा है।
संस्थान के निदेशक Manindra Agrawal पहले भी मौजूदा जेईई एडवांस परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका मानना है कि परीक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जिससे छात्र कम दबाव में अपनी वास्तविक योग्यता दिखा सकें। उनके अनुसार नई प्रणाली छात्रों के लिए अधिक संतुलित और न्यायसंगत हो सकती है।
चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बना सकता है। इसके साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि इससे कोचिंग संस्थानों पर अत्यधिक निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
फिलहाल आईआईटी में प्रवेश के लिए दो चरणों की परीक्षा प्रणाली लागू है। पहले चरण में Joint Entrance Examination (Main) यानी जेईई मेन आयोजित की जाती है, जिसमें देशभर से लाखों छात्र शामिल होते हैं। इसके बाद शीर्ष रैंक प्राप्त करने वाले लगभग ढाई लाख उम्मीदवारों को ही जेईई एडवांस परीक्षा देने का मौका मिलता है।
लागू होने से पहले कई मंजूरियां जरूरी
यदि नया एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट मंजूर हो जाता है, तो जेईई एडवांस की परीक्षा का स्वरूप काफी बदल सकता है। हालांकि इसे लागू करने से पहले आईआईटी की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े कई संस्थागत निकायों की मंजूरी आवश्यक होगी।
इसके अलावा इस प्रणाली को सीधे लागू करने के बजाय पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में परीक्षण किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक आधारित यह प्रणाली परीक्षा को अधिक सुरक्षित और लचीला बना सकती है।
रटने से नहीं, समझ से मिलेगी सफलता
प्रस्तावित नए मॉडल में छात्रों की तार्किक क्षमता, समझ और समस्या-समाधान कौशल को अधिक महत्व दिया जाएगा। यानी केवल फॉर्मूले याद करने या रटने के बजाय अवधारणाओं की समझ ज्यादा जरूरी होगी।
इस व्यवस्था में हर छात्र को उसकी प्रदर्शन क्षमता के अनुसार प्रश्न मिलेंगे। इससे परीक्षा का स्तर संतुलित रहेगा और वास्तविक प्रतिभा सामने आने की संभावना बढ़ेगी।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल का कहना है कि नया एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट अभी परीक्षण चरण में है और इसे पायलट परियोजना के रूप में आजमाने की तैयारी चल रही है। उनका मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इससे छात्रों को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा और परीक्षा प्रणाली अधिक निष्पक्ष बन सकेगी।




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