
देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए Indian Air Force अब स्वदेशी ड्रोन और अत्याधुनिक तकनीकों को अपने बेड़े में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने हाल ही में Indian Institute of Technology Kanpur के स्टार्टअप इकोसिस्टम का दौरा किया और वहां विकसित हो रही नई ड्रोन तकनीकों का करीब से अध्ययन किया।
यह दौरा विशेष रूप से संस्थान के Startup Incubation and Innovation Centre IIT Kanpur (SIIC) में किया गया, जहां एयरोस्पेस, डिफेंस और उभरती तकनीकों से जुड़े कई स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने इन स्टार्टअप्स के उत्पादों और उनके संभावित सैन्य उपयोगों पर विस्तार से चर्चा की।
ड्रोन तकनीक में कई नए प्रयोग
दौरे के दौरान वायुसेना अधिकारियों ने विभिन्न तरह के ड्रोन और मानव रहित विमान (UAV) देखे, जिन्हें अलग-अलग सैन्य और नागरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें सौर ऊर्जा से उड़ान भरने वाले यूएवी, निगरानी के लिए छोटे सर्विलांस ड्रोन, आपदा राहत कार्यों में मदद करने वाले ड्रोन और पहाड़ी इलाकों में भारी सामान पहुंचाने वाले ड्रोन शामिल हैं।
इसके अलावा ऐसे ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए जो मिशन के दौरान रडार से बचकर काम कर सकते हैं या लक्ष्य के पास पहुंचकर हमला करने की क्षमता रखते हैं। इन तकनीकों को भविष्य के युद्ध और सीमा निगरानी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
स्टार्टअप्स से सीधे संवाद
वायुसेना के अधिकारियों ने एक-एक स्टार्टअप के संस्थापकों से बातचीत कर उनके उत्पादों की खासियत और तकनीकी क्षमताओं को समझा। अधिकारियों ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियों की भी जानकारी दी, ताकि स्टार्टअप्स अपने शोध और तकनीक को उन जरूरतों के अनुसार बेहतर बना सकें।
इस दौरे में एयर वाइस मार्शल टी.पी. सिंह के साथ एयर कमोडोर एम.के. मिश्रा, एयर कमोडोर मुकुल भाटिया, ग्रुप कैप्टन ए. ठाकुर, विंग कमांडर ई.वी. लावान्या, विंग कमांडर चंदन तिवारी, विंग कमांडर मानवेंद्र सिंह और विंग कमांडर शैलेंद्र सीता भी मौजूद रहे।
अनुसंधान सुविधाओं का भी किया निरीक्षण
वायुसेना की टीम ने संस्थान के टेक्नोपार्क, एयरस्ट्रिप और हैंगर सुविधाओं का भी दौरा किया। इसके साथ ही टेस्टिंग लैब्स, राष्ट्रीय स्तर की विंड टनल सुविधा और ईएमआई लैब्स में चल रहे अनुसंधान कार्यों के बारे में भी जानकारी ली।
इस दौरान SIIC के प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. दीपू फिलिप ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित करीब 30 प्रकार के ड्रोन पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे हैं, जिनमें रक्षा और निगरानी से जुड़े कार्य भी शामिल हैं।
स्वदेशी तकनीक को मिल सकता है बड़ा मौका
इस निरीक्षण के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि आने वाले समय में भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में आईआईटी कानपुर के विकसित किए गए और अधिक ड्रोन और यूएवी शामिल कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी तकनीक पर जोर देने से देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।




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