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CBSE ने बढ़ाया डिजिटल कंटेंट पर ज़ोर, स्कूलों को PM e-Vidya संसाधनों के उपयोग की सलाह

CBSE ने बढ़ाया डिजिटल कंटेंट पर ज़ोर, स्कूलों को PM e-Vidya संसाधनों के उपयोग की सलाह

CBSE ने बढ़ाया डिजिटल कंटेंट पर ज़ोर, स्कूलों को PM e-Vidya संसाधनों के उपयोग की सलाह

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों से क्लासरूम टीचिंग में डिजिटल कंटेंट का अधिक उपयोग करने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि स्कूलों को PM e-Vidya प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध टीवी चैनलों और ई-वीडियो लेसन का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पढ़ाई को और सुगम और प्रभावी बनाया जा सके।

CBSE के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म सिलेबस से जुड़े रिकॉर्डेड लेसन प्रदान करता है, जिन्हें छात्र अपनी गति के अनुसार कभी भी दोबारा देख सकते हैं। ये वीडियो न सिर्फ अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता और विषय समझ को मजबूत करने में मदद करते हैं, बल्कि टीचर्स के लिए ट्रेनिंग और आधुनिक शिक्षण तकनीकों को समझने में भी उपयोगी हैं।

बोर्ड ने खास तौर पर PM e-Vidya के CBSE-15 टीवी चैनल के इस्तेमाल पर जोर दिया है। यह चैनल वर्ष 2024 में शुरू की गई उस राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है, जिसके तहत 200 DTH शैक्षणिक टीवी चैनल लॉन्च किए जा रहे हैं। इन चैनलों पर करिकुलम आधारित कार्यक्रम प्रसारित होते हैं, जिनमें टीचिंग मेथड, क्लासरूम मैनेजमेंट, असेसमेंट तकनीक और विषय-विशेष सीखने से जुड़े एपिसोड शामिल हैं। CBSE अधिकारियों का कहना है कि इस प्रयास का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर छात्र तक पहुंचाना है, खासकर उन बच्चों तक जिन्हें तकनीकी साधनों तक पहुंचने में भौगोलिक या आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

फिलहाल प्लेटफॉर्म पर 67 डिजिटल ई-वीडियो उपलब्ध हैं। इनमें कक्षा 9 के लिए रियल नंबर और कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री जैसे विषयों से लेकर आर्ट-इंटीग्रेटेड लर्निंग, स्टोरीटेलिंग-आधारित टीचिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल समझ, मैथमेटिक्स टीचिंग प्लानिंग, कोऑपरेटिव लर्निंग और यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ लर्निंग जैसे ट्रेनिंग मॉड्यूल शामिल हैं। इसके अलावा, नई शिक्षा नीति 2020 और साइंस, गणित तथा सोशल साइंस पढ़ाने की रणनीतियों पर भी विस्तृत सत्र उपलब्ध कराए गए हैं।

CBSE ने शिक्षकों को सलाह दी है कि वे इन डिजिटल वीडियो को अपने लेसन प्लान और कक्षा गतिविधियों में शामिल करें। छात्रों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे कॉन्सेप्ट समझने और स्वयं अध्ययन के लिए इन वीडियो का उपयोग करें। साथ ही, स्कूल प्रिंसिपल्स को आवश्यक तकनीकी ढांचा विकसित करने और कंटेंट की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि यह पहल डिजिटल और स्किल-बेस्ड लर्निंग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन जिन स्कूलों में तकनीकी संसाधन सीमित हैं, उन्हें आधारभूत ढांचे और शिक्षक प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है।

फिर भी, शिक्षा जगत का एक बड़ा वर्ग मानता है कि अगर इस पहल को सही दिशा में लागू किया गया, तो यह छात्रों की सीखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है और डिजिटल शिक्षा को नए स्तर पर ले जा सकता है।

Asmita Sarkar

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