
भारत में इंजीनियरिंग पढ़ने वाले छात्रों और समुद्री विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह सप्ताह खास है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT Madras) का ओशन इंजीनियरिंग विभाग अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर चुका है। 1977 में शुरू हुआ यह विभाग आज देश के समुद्री शोध, तटीय सुरक्षा और समुद्री तकनीक का प्रमुख केंद्र बन गया है। इन पाँच दशकों में इस विभाग ने न केवल विशेषज्ञ इंजीनियर तैयार किए, बल्कि समुद्री बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने में भी अहम भूमिका निभाई है।
देश में सबसे खास और सीमित कोर्स
भारत में केवल IIT Madras और IIT Kharagpur ही ओशन इंजीनियरिंग में विशेषीकृत अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम उपलब्ध कराते हैं। यह वह क्षेत्र है, जो सीधे देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री रक्षा से जुड़ा हुआ है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत इस विभाग में कई ऐसी तकनीकें विकसित की गईं, जो पहले विदेशों पर निर्भर थीं।
AI और ग्रीन एनर्जी पर अगला फोकस
IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि का कहना है कि विभाग अब आगे की तकनीकों पर काम कर रहा है— समुद्री लहरों से ऊर्जा उत्पादन, तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने की नई तकनीक, और AI तथा डेटा साइंस के इस्तेमाल से समुद्री अध्ययन को और सटीक बनाना।
आने वाले सत्रों में विभाग के कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत डेटा मॉडलिंग को शामिल किया जाएगा, ताकि समुद्र की बदलती परिस्थितियों को गहराई से समझा जा सके।
देश के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका
चिल्का झील का पुनरुद्धार
ओडिशा की प्रसिद्ध चिल्का झील में समुद्री जल के प्रवाह को नियंत्रित करने और नया मुहाना डिजाइन करने में विभाग की रिसर्च टीम का बड़ा योगदान रहा। इसके बाद झील की पारिस्थितिकी बेहतर हुई और इरावदी डॉल्फ़िन की संख्या में भी सुधार देखा गया।
पुडुचेरी में तटीय सुरक्षा
पुडुचेरी में समुद्री कटाव रोकने के लिए तैयार किया गया आर्टिफ़िशियल रीफ सिस्टम IIT मद्रास के शोध का ही परिणाम है, जिसने तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाया।
विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट
केरल के विझिंजम पोर्ट को कमर्शियल उपयोग के लिए सक्षम घोषित करने में IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम ने निर्णायक भूमिका निभाई। तटीय लहरों, जल गहराई और समुद्री स्थिरता पर इनके अध्ययन ने परियोजना को गति दी।
ISRO और भारतीय नौसेना के साथ सहयोग
अंतरिक्ष से लौटने वाले मॉड्यूल की समुद्री परीक्षण से लेकर नौसेना के जहाजों के डिजाइन और सुरक्षा मूल्यांकन तक, विभाग का काम सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
एशिया की सबसे उन्नत सुविधाओं वाली लैब
IIT मद्रास में एशिया का सबसे बड़ा वेव बेसिन मौजूद है, जहां समुद्र की ऊंची लहरों और उनके प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही एक 360-डिग्री शिप सिम्युलेटर भी है, जिसके जरिए बंदरगाह प्रबंधन और जहाज संचालन की ट्रेनिंग दी जाती है। यह तकनीक एशिया में अपनी तरह की सबसे आधुनिक सुविधाओं में गिनी जाती है।
करियर के लिए सुनहरा मौका
वर्तमान में विभाग में करीब 600 छात्र पढ़ रहे हैं। यहां से स्नातक होने वाले छात्र विश्वभर में नेवल आर्किटेक्चर, पोर्ट प्लानिंग, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, ऑफशोर स्ट्रक्चर और मरीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में करियर बना रहे हैं।
क्यूएस (QS) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में IIT मद्रास का पेट्रोलियम इंजीनियरिंग प्रोग्राम दुनिया में 31वें स्थान पर है, जो इसकी वैश्विक साख को मजबूत करता है।
50 साल पूरे होने के बाद ओशन इंजीनियरिंग विभाग सिर्फ एक शैक्षणिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की समुद्री ताकत का स्तंभ बन चुका है। बदलते जलवायु संकट, ऊर्जा आवश्यकताओं और समुद्री व्यापार के दौर में यह विभाग आने वाले वर्षों में भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को और सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।




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