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नई शिक्षा नीति के तहत आर्किटेक्चर कोर्स में बड़ा बदलाव, 2026-27 सत्र से लागू होंगे नए नियम

नई शिक्षा नीति के तहत आर्किटेक्चर कोर्स में बड़ा बदलाव, 2026-27 सत्र से लागू होंगे नए नियम

नई शिक्षा नीति के तहत आर्किटेक्चर कोर्स में बड़ा बदलाव, 2026-27 सत्र से लागू होंगे नए नियम

देश में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की दिशा में लागू की गई नई शिक्षा नीति के बाद अब प्रोफेशनल कोर्सेज में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इंजीनियरिंग और फार्मेसी की तरह आर्किटेक्चर शिक्षा में भी अहम संशोधन किए गए हैं। इसी क्रम में Council of Architecture (CoA) ने आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम के ढांचे में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है।

संशोधित नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे। इनके तहत बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (B.Arch) कार्यक्रम की संरचना में बड़े बदलाव किए जाएंगे, जिससे पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक, तकनीक आधारित और कौशल उन्मुख बनाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, CoA आमतौर पर 10 सेमेस्टर के एक पूर्ण शैक्षणिक चक्र के बाद पाठ्यक्रम की समीक्षा करता है। वर्ष 2020 की शिक्षा नीति लागू होने के बाद परिषद ने नया अकादमिक ढांचा तैयार किया, जिसमें आधुनिक तकनीक, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और स्किल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

पांच साल की अवधि में फैले इस कोर्स को दस सेमेस्टर में पूरा किया जाएगा। नए ढांचे के तहत छात्रों को डिग्री पूरी करने के लिए कुल 276 क्रेडिट हासिल करने होंगे। इसके लिए हर सेमेस्टर में 26 से 30 क्रेडिट अर्जित करना अनिवार्य होगा।

सबसे अहम बदलावों में पास होने के नियम शामिल हैं। अब छात्रों को हर विषय के प्रत्येक हिस्से में कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। पहले अलग-अलग विषयों के लिए अलग पासिंग मानदंड थे, लेकिन नए नियमों का उद्देश्य मूल्यांकन प्रणाली को एक समान बनाना है।

तेजी से बदलती तकनीक को देखते हुए पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अलग विषय शामिल किया गया है। यह सभी आर्किटेक्चर छात्रों के लिए अनिवार्य होगा। डिजाइन और प्लानिंग में डिजिटल टूल्स के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पाठ्यक्रम में एक और बड़ा बदलाव यह है कि पूरा नौवां सेमेस्टर इंटर्नशिप या हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के लिए समर्पित रहेगा। इससे छात्रों को वास्तविक कार्य परिस्थितियों में सीखने का अवसर मिलेगा। कोर्स पूरा करने वाले छात्रों को कैपस्टोन प्रोजेक्ट भी करना होगा, जिसमें वे गहन रिसर्च और बेहतर योजना पर आधारित अपना डिजाइन प्रस्तुत करेंगे।

परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। अब छात्रों को दो अलग-अलग प्रश्नपत्र देने की जरूरत नहीं होगी। उनकी जगह 50 अंकों का एक ही प्रश्नपत्र होगा।

इन बदलावों से आर्किटेक्चर शिक्षा को ज्यादा प्रैक्टिकल, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Asmita Sarkar

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