
मैंगलूरु में हाल ही में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन “CriFo 2K26 – Forensic Session” में जटिल अपराधों को सुलझाने में इस्तेमाल होने वाली उन्नत फॉरेंसिक तकनीकों और उनके वास्तविक उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में फिजिकल और डिजिटल—दोनों तरह के साक्ष्यों की जांच से जुड़े नवीन तरीकों को विशेषज्ञों ने साझा किया।
यह सम्मेलन स्कूल ऑफ सोशल वर्क, रोशनी निलया, मैंगलूरु के क्रिमिनोलॉजी और फॉरेंसिक साइंस विभाग द्वारा AVZ Cyber Security Solutions Pvt. Ltd. के सहयोग से आयोजित किया गया। कॉलेज की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम में फॉरेंसिक विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद और विद्यार्थी एक साथ जुड़े, जिससे ज्ञान और अनुभव का महत्वपूर्ण आदान-प्रदान संभव हो सका।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्तव्य देते हुए दक्षिण कन्नड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार भूम्मारड्डी ने कहा कि आज फॉरेंसिक विज्ञान आपराधिक जांच का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक विश्लेषण न केवल साक्ष्यों को मजबूत बनाता है, बल्कि न्याय प्रणाली को अधिक सटीक और पारदर्शी भी करता है।
सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में चार विशेषज्ञ सत्र शामिल थे।
केएस गिरीश, सहायक निदेशक, रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, मैंगलूरु, ने “Advances in Forensic Chemical Analysis” विषय पर जानकारी दी। वहीं पट्टाथिल धान्या मेनन, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, Avanzo Cyber Security Solutions, ने “Cybercrime and Digital Forensics: Intuition to Innovation” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में फॉरेंसिक तकनीकों के व्यावहारिक प्रदर्शन और वर्कशॉप भी आयोजित किए गए, जिनमें साक्ष्य संरक्षण, हैंडलिंग और विश्लेषण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। राज्यभर के 18 शैक्षणिक संस्थानों से आए 220 से अधिक प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया, जिससे यह आयोजन ज्ञान-विस्तार और तकनीकी अपडेट के लिहाज़ से बेहद उपयोगी साबित हुआ।




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