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जम्मू यूनिवर्सिटी ने बदला सिलेबस: अब जिन्ना की जगह पढ़ाए जाएंगे शहीद भगत सिंह के विचार

जम्मू यूनिवर्सिटी ने बदला सिलेबस: अब जिन्ना की जगह पढ़ाए जाएंगे शहीद भगत सिंह के विचार

जम्मू यूनिवर्सिटी ने बदला सिलेबस: अब जिन्ना की जगह पढ़ाए जाएंगे शहीद भगत सिंह के विचार

जम्मू यूनिवर्सिटी ने अपने पॉलिटिकल साइंस विभाग के सिलेबस में बड़ा बदलाव करते हुए मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़े विषयों को हटाने और उनकी जगह शहीद भगत सिंह के विचारों को शामिल करने का फैसला किया है। यह निर्णय मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ स्टडीज (BoS) की बैठक में लिया गया, जिसमें विभागाध्यक्ष की अगुवाई में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य सिलेबस की समीक्षा और उसमें आवश्यक बदलाव करना था। इस दौरान कई मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई और कुछ मामलों में मतभेद भी सामने आए। बैठक में शामिल एक सदस्य के अनुसार विभागाध्यक्ष ने कहा कि राजनीति विज्ञान जैसे विषय को समझने के लिए सभी तरह के विचारों को पढ़ाना जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रामायण को समझने के लिए राम और रावण दोनों के दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है, वैसे ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को पढ़ते समय पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस समेत सभी विचारधाराओं को देखना जरूरी है।

हालांकि, बैठक में मौजूद कुछ सदस्यों ने जिन्ना को सिलेबस में बनाए रखने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिन्ना को अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पेश करना सही नहीं है और इससे भ्रम पैदा हो सकता है। लंबे समय तक चली चर्चा के बाद आखिरकार सहमति बनी कि जिन्ना से जुड़े सभी टॉपिक्स को सिलेबस से हटाया जाए। इसके बाद समिति ने यह भी निर्णय लिया कि शहीद भगत सिंह को “आजाद भारत की दृष्टि” के संदर्भ में शामिल किया जाए।

वहीं, अल्लामा इकबाल और सर सैय्यद अहमद खान से जुड़े विषयों पर किसी सदस्य ने आपत्ति नहीं जताई, इसलिए दोनों को सिलेबस में बनाए रखने का निर्णय लिया गया। अब यह सिफारिश कुलपति के पास भेजी गई है, जहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नया सिलेबस लागू किया जाएगा।

पिछली बैठक में भी उठी थी संशोधन की मांग

इससे पहले रविवार को हुई पॉलिटिकल साइंस विभाग की डिपार्टमेंटल अफेयर्स कमेटी (DAC) की बैठक में भी जिन्ना, इकबाल और सर सैय्यद अहमद खान से जुड़े कुछ टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई थी। मंगलवार की BoS बैठक उसी प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा का अगला चरण थी।

नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस सिलेबस में स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक भारत से जुड़ी विचारधाराओं को एक नए परिप्रेक्ष्य के साथ पढ़ाया जाएगा।

Asmita Sarkar

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