
भारत में उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पर एक अहम रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। Azim Premji University द्वारा 17 मार्च को जारी रिपोर्ट “The State of Working India 2026” में बताया गया है कि देश में ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों में से 7% से भी कम को एक साल के भीतर स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है। इनमें भी सिर्फ 3.7% ही ‘व्हाइट-कॉलर’ यानी ऑफिस आधारित नौकरियां हासिल कर पाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति युवाओं के लिए नौकरी पाने की बढ़ती मुश्किलों को दर्शाती है। “Youth in the Labour Market: Pathways from Learning to Earning” शीर्षक से जारी इस अध्ययन में पिछले 40 वर्षों के रोजगार रुझानों का विश्लेषण किया गया है, जिससे यह समझने की कोशिश की गई है कि भारत अपनी युवा आबादी का किस तरह उपयोग कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों, खासकर Periodic Labour Force Survey (PLFS) के अनुसार, 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के बीच बेरोजगारी दर 14.8% है, जो देश की कुल बेरोजगारी दर 4.9% से लगभग तीन गुना अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि करीब 41% पुरुष ग्रेजुएट चार महीने के भीतर किसी न किसी प्रकार का रोजगार हासिल कर लेते हैं, लेकिन एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जो तीन साल बाद भी बेरोजगार रहता है। यह दिखाता है कि बढ़ती पढ़ी-लिखी युवा आबादी के मुकाबले पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं—जो लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
इस बेरोजगारी का एक बड़ा कारण यह भी है कि सीमित नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। 20 से 29 वर्ष के कई युवा या तो बेहतर नौकरी का इंतजार कर रहे हैं या फिर आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं, जिससे उनका जॉब मार्केट में प्रवेश देर से हो रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 25 वर्ष से कम उम्र के ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 39.33% रही, जो 1983 के 35.02% के मुकाबले काफी अधिक है।
सैलरी ग्रोथ भी धीमी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में ग्रेजुएट और नॉन-ग्रेजुएट के बीच आय का अंतर कम हुआ है। 2004 से 2011 के बीच ग्रेजुएट्स की आय में अच्छी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन 2017 के बाद वेतन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
कुछ विशेषज्ञ इसे इस संकेत के रूप में देखते हैं कि नौकरी बाजार में डिग्री का महत्व पहले जैसा नहीं रहा। हालांकि, रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका और एपीयू की एसोसिएट प्रोफेसर Rosa Abraham का मानना है कि ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
उनका कहना है कि भले ही ग्रेजुएट्स की सैलरी में ठहराव आया हो, फिर भी उनकी आय नॉन-ग्रेजुएट्स से दोगुने से ज्यादा बनी हुई है।
पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा में नामांकन भी घट रहा है। 2017 में जहां 38% युवा पुरुष पढ़ाई कर रहे थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 34% रह गया है।
PLFS के मुताबिक, पढ़ाई छोड़ने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक दबाव है। 2017 में 58% युवाओं ने परिवार की आय में योगदान देने की मजबूरी बताई थी, जो 2023 में बढ़कर 72% हो गई।
यह बदलाव दिखाता है कि कम आय वाले परिवारों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, जिसके चलते वे बच्चों की शिक्षा में निवेश करने में असमर्थ होते जा रहे हैं—खासकर तब जब उसका भविष्य अनिश्चित नजर आता है।
इंडस्ट्री और शिक्षा के बीच दूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसके साथ अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा।
Symbiosis International University की प्रो-चांसलर Vidya Yeravdekar के अनुसार, शिक्षा संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उनका कहना है कि कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम अक्सर इंडस्ट्री की जरूरतों से मेल नहीं खाता, जिसके कारण कंपनियों को डिग्रीधारी युवाओं को दोबारा प्रशिक्षित करना पड़ता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सिलेबस तैयार करते समय इंडस्ट्री विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, उन्हें यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक निकायों का हिस्सा बनाया जाए और छात्रों को नियमित इंटर्नशिप के जरिए व्यावहारिक अनुभव दिया जाए।
गुणवत्ता वाली नौकरियों की जरूरत
छात्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्रीधारकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उसी अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बन पा रहे हैं। इससे लाखों युवा स्थिर और सम्मानजनक रोजगार से वंचित रह जाते हैं।
दिल्ली के एक पोस्टग्रेजुएट छात्र अमिताभ पांडे के मुताबिक, भारत के सामने असली चुनौती सिर्फ नौकरियां पैदा करना नहीं है, बल्कि ऐसी नौकरियां तैयार करना है जो उच्च गुणवत्ता की हों और शिक्षित युवाओं के कौशल के अनुरूप हों।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट भारत के शिक्षा और रोजगार ढांचे के बीच मौजूद अंतर को उजागर करती है और यह संकेत देती है कि आने वाले समय में इस खाई को पाटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।




Add comment