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नरेला में बनेगी ‘एजुकेशन सिटी’: साझा कैंपस मॉडल से दिल्ली बनेगा हायर एजुकेशन का नया हब

नरेला में बनेगी ‘एजुकेशन सिटी’: साझा कैंपस मॉडल से दिल्ली बनेगा हायर एजुकेशन का नया हब

नरेला में बनेगी ‘एजुकेशन सिटी’: साझा कैंपस मॉडल से दिल्ली बनेगा हायर एजुकेशन का नया हब

दिल्ली में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए सरकार एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राजधानी के नरेला इलाके में ‘एजुकेशन सिटी’ विकसित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसे ‘शेयर्ड कैंपस मॉडल’ पर तैयार किया जाएगा, जहां अलग-अलग सरकारी विश्वविद्यालय एक ही परिसर में अपनी पहचान बनाए रखते हुए संसाधनों को साझा करेंगे।

करीब 160 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस एजुकेशन और इनोवेशन हब को विश्वस्तरीय बनाने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में इसके लिए 500 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 1300 करोड़ रुपये कर दिया गया है। परियोजना के तहत अब तक Delhi Development Authority को लगभग 452 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

कई प्रमुख विश्वविद्यालय होंगे शामिल

इस एजुकेशन सिटी में दिल्ली के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के नए कैंपस विकसित किए जाएंगे। इनमें Delhi Teachers University, Guru Gobind Singh Indraprastha University, Indira Gandhi Delhi Technical University for Women, Delhi Skill and Entrepreneurship University, Delhi Pharmaceutical Sciences and Research University और Delhi Technological University जैसे संस्थान शामिल हैं।

इनमें से कुछ विश्वविद्यालयों को जमीन भी आवंटित की जा चुकी है। उदाहरण के तौर पर DeTU और IPU को जमीन के पजेशन लेटर दिए जा चुके हैं, जबकि IGDTUW को लगभग 50 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कुछ कोर्स पहले ही इन संस्थानों द्वारा अपने मौजूदा कैंपस से इस प्रोजेक्ट के नाम पर शुरू किए जा चुके हैं।

कैसी होंगी सुविधाएं

सरकार का लक्ष्य है कि यह एजुकेशन सिटी सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों को आकर्षित करे। इसके लिए यहां आधुनिक लाइब्रेरी, हाईटेक लैब्स, सेमिनार हॉल, ऑडिटोरियम और रिसर्च व इनोवेशन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी विश्वविद्यालय इन सुविधाओं का साझा उपयोग करेंगे। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। इसके अलावा फैकल्टी और स्टाफ के लिए रिहायशी कॉम्प्लेक्स भी विकसित किए जाएंगे, जिनमें अलग-अलग आय वर्ग के लिए फ्लैट्स उपलब्ध होंगे। हॉस्टल और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए करीब 567 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

बेहतर कनेक्टिविटी पर भी फोकस

नरेला एजुकेशन सिटी को ट्रांसपोर्ट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस परियोजना को केंद्र सरकार की ट्रांजिट हब पॉलिसी से जोड़ने की योजना है, ताकि मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।

इसके साथ ही Rithala–Narela Metro Corridor और UER-1 जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिससे नरेला की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से न सिर्फ छात्रों को सुविधा मिलेगी, बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

साझा कैंपस मॉडल क्यों है खास

दुनिया के कई देशों में इस तरह के एजुकेशन हब पहले से मौजूद हैं, जहां अलग-अलग संस्थान अपनी पहचान बनाए रखते हुए सुविधाएं साझा करते हैं। अमेरिका, यूके, सिंगापुर और खाड़ी देशों में ऐसे मॉडल सफल साबित हुए हैं।

इस व्यवस्था से कम जगह में ज्यादा संस्थान विकसित किए जा सकते हैं और खर्च भी नियंत्रित रहता है। साथ ही, छात्रों और शिक्षकों को एक ही जगह पर बेहतर संसाधन और रिसर्च के अवसर मिलते हैं। यह मॉडल एक तरह का शैक्षणिक इकोसिस्टम तैयार करता है, जहां पढ़ाई, रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल बनता है।

दिल्ली को मिलेगा नया एजुकेशन हब

नरेला एजुकेशन सिटी का मकसद दिल्ली को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित करना है। अगर यह योजना तय समय पर पूरी होती है, तो यह न सिर्फ छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि राजधानी में शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

Asmita Sarkar

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