
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने सत्ता संभालते ही देश में शासन और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। शपथग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने 100 सूत्रीय एजेंडा पेश किया, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के व्यापक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। उनका फोकस पढ़ाई को ज्यादा समावेशी, छात्रों के अनुकूल और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त बनाना है। 35 वर्षीय बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
शाह की पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों ने साफ कर दिया कि सरकार की मंशा स्कूलों और विश्वविद्यालयों को पढ़ाई-केंद्रित बनाना है। इसके तहत राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे संगठन तय समय सीमा के भीतर कैंपस खाली कर दें। इसके स्थान पर सरकार अगले 90 दिनों में गैर-राजनीतिक “छात्र परिषदें” शुरू करेगी। इन परिषदों का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं और मांगों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के सामने लाना होगा।
कौन हैं बालेंद्र शाह?
बालेन शाह राजनीति में आने से पहले एक जाने-माने रैपर और स्ट्रक्चरल इंजीनियर थे। उन्होंने भारत के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VNIT), नागपुर से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एम.टेक किया है। 2022 में वे एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर बने और उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती चली गई। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की स्थापना की और 2025 के जनांदोलन के बाद हुए राष्ट्रीय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की, जिसके बाद वे प्रधानमंत्री बने।
नेपाल सरकार का नया आदेश
सरकार द्वारा जारी दस्तावेज में कहा गया है कि प्रशासनिक ढांचे को राजनीति-मुक्त बनाया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के राजनीतिक दलों से जुड़े रहने पर रोक लगाई जाएगी, साथ ही पक्षपातपूर्ण ट्रेड यूनियनों को खत्म करने की योजना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि कैंपस से राजनीतिक प्रभाव हटने के बाद शिक्षा का माहौल बेहतर होगा और छात्रों की वास्तविक आवाज सामने आएगी।
5वीं क्लास तक परीक्षाएं खत्म
शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों के तहत अब 5वीं क्लास तक के छात्रों के लिए पारंपरिक परीक्षाएं खत्म कर दी गई हैं। उनकी प्रगति का मूल्यांकन वैकल्पिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से किया जाएगा, ताकि बच्चों को तनावमुक्त और समग्र सीखने का माहौल मिल सके। विश्वविद्यालयों को भी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार समय पर परिणाम जारी करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अब नेपाली विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं रहेगा।
बालेन शाह की नई नीतियों को नेपाल के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। उनके कदमों को राजनीति से आगे बढ़कर एक ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जहां शिक्षा वास्तव में छात्रों के हितों के अनुसार ढल सके और उनका भविष्य मजबूत हो सके।




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