
देश में स्कूली शिक्षा को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों और 22 राज्यों के सरकारी स्कूलों में अब कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) पढ़ाई जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में इस पाठ्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि यह पहल बच्चों को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में अहम कदम है।
नई व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किया गया है। विशेषज्ञ संस्था NCERT ने इस पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया है कि बच्चे शुरुआती कक्षाओं से ही तकनीक को समझें और रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित करें।
इस पाठ्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने के लिए गेम, पजल और गतिविधियों का सहारा लिया जाएगा। छात्रों को जटिल समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करना, टीम में काम करना और तार्किक तरीके से सोचने की ट्रेनिंग दी जाएगी। परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किया गया है, जहां अब रटने की बजाय समझ और कौशल पर अधिक जोर होगा।
शिक्षकों के लिए विस्तृत गाइड और छात्रों के लिए नियमित मूल्यांकन की व्यवस्था भी इसमें शामिल की गई है, ताकि सीखने की प्रक्रिया लगातार बेहतर हो सके। कंप्यूटेशनल थिंकिंग को AI की बुनियाद माना जाता है, इसलिए इस पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे छात्रों में समस्या समाधान, पैटर्न पहचान और विश्लेषण की क्षमता विकसित हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को टेक्नोलॉजी और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में मदद करेगी। इससे छात्र न सिर्फ डिजिटल दुनिया को समझ पाएंगे, बल्कि भविष्य में उसे दिशा देने की क्षमता भी विकसित कर सकेंगे।




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