
MIT इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के स्कूल ऑफ डिजाइन ने D’KODE 2026 की शुरुआत दो दिवसीय टाइपोग्राफी समिट (28–29 मार्च) के साथ की। इस समिट में भारत और विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और डिजाइन, कम्युनिकेशन तथा डिजिटल इंटरफेस में टाइपोग्राफी की बदलती भूमिका पर गहन चर्चा की।
इस समिट में अमेरिका की टाइपोग्राफर गेरी कैनोनिको, भारत के सारंग कुलकर्णी और डिजिटल फॉन्ट विशेषज्ञ नूपुर दात्ये ने चर्चा का नेतृत्व किया। बातचीत के प्रमुख विषयों में वैरिएबल फॉन्ट्स, एआई आधारित टाइप डिजाइन और इनक्लूसिव टाइपोग्राफी शामिल रहे, जो टेक्नोलॉजी की मदद से विजुअल कम्युनिकेशन को नया रूप दे रहे हैं।
समिट के दौरान आयोजित वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को ग्लिफ्स और FontForge जैसे टूल्स के जरिए फॉन्ट बनाने का व्यावहारिक अनुभव दिया गया। इसके साथ ही ब्रांडिंग और UI/UX से जुड़े रियल-वर्ल्ड केस स्टडीज भी शामिल किए गए। डिजाइन स्प्रिंट्स के जरिए लाइव सेशन्स में प्रतिभागियों को नए टाइपफेस का उपयोग करने का मौका मिला, जबकि एग्जीबिशन में प्रयोगात्मक और नवाचारी डिजाइन प्रदर्शित किए गए
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभाव से टाइपोग्राफी के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब डिजाइन कॉलेज इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी स्किल्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जो कौशल पहले कम महत्वपूर्ण माना जाता था, वह आज ग्लोबल डिजिटल मार्केट में अहम भूमिका निभा रहा है।
D’KODE 2026 के जरिए यह भी स्पष्ट हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रॉस-कल्चरल इंटरैक्शन के कारण डिजाइन क्षेत्र में नई स्किल्स की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। टाइपोग्राफी अब सिर्फ अक्षरों की डिजाइन नहीं रह गई है, बल्कि यह पढ़ने, महसूस करने और कहानी कहने का माध्यम बन चुकी है। यह केवल दिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक्सेसिबिलिटी, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और प्रभावी कम्युनिकेशन सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।




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