
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में हालिया गिरावट ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार फरवरी 2026 तक अमेरिका में 3,52,644 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो फरवरी 2025 के 3,78,787 के मुकाबले करीब 6.9 प्रतिशत कम है। ये आंकड़े अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की छात्र और विनिमय आगंतुक सूचना प्रणाली (SEVIS) के डेटा पर आधारित हैं।
किस स्तर पर पढ़ रहे हैं भारतीय छात्र
सरकार के मुताबिक भारतीय छात्र अमेरिका में स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक लगभग हर स्तर पर नामांकित हैं। इनमें प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल, हाई स्कूल, वोकेशनल और लैंग्वेज ट्रेनिंग, फ्लाइट स्कूल, बैचलर्स, मास्टर्स और डॉक्टरेट जैसे कोर्स शामिल हैं। लंबे समय से अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि परिस्थितियां बदल रही हैं।
वीजा सख्ती और बढ़ी निगरानी
राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने माना कि वीजा प्रक्रिया में बढ़ती सख्ती और जांच का सीधा असर छात्र संख्या पर पड़ा है। जून 2025 में अमेरिका ने वीजा से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि वीजा “अधिकार नहीं, बल्कि विशेषाधिकार” है।
नई व्यवस्था के तहत हर आवेदन को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से जांचा जाता है। इतना ही नहीं, आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की भी पड़ताल की जाती है और प्रोफाइल को सार्वजनिक रखने की शर्त जोड़ी गई है। इससे वीजा प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त और विस्तृत हो गई है।
वीजा मिलने के बाद भी नजर
सख्ती सिर्फ वीजा मिलने तक सीमित नहीं है। नियमों के तहत अमेरिका में रहने के दौरान भी छात्रों पर निगरानी जारी रहती है। अगर कोई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, छोटे या बड़े कानूनी उल्लंघन करता है, वीजा अवधि से ज्यादा रुकता है या शर्तों के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसका वीजा रद्द किया जा सकता है और उसे वापस भेजा जा सकता है।
भारत सरकार की भूमिका
विदेश मंत्रालय ने संसद में स्पष्ट किया कि वीजा नीति किसी भी देश का संप्रभु अधिकार होता है। इसके बावजूद भारत सरकार लगातार अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है और भारतीय छात्रों व पेशेवरों के लिए सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है।
बदलते रुझान का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा नियमों में सख्ती, बढ़ती लागत और वैश्विक शिक्षा के विकल्पों के विस्तार ने छात्रों के रुझान को प्रभावित किया है। हालांकि अमेरिका अब भी भारतीय छात्रों के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है, लेकिन हालिया गिरावट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में छात्रों के फैसलों पर नीतिगत बदलावों का असर और ज्यादा दिख सकता है।




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