
अगर कोई आपसे पूछे कि प्रोडक्ट डिज़ाइन क्या होता है, तो शायद आप कहेंगे—“प्रोडक्ट्स को डिज़ाइन करना, है ना?” और यह जवाब गलत भी नहीं है, लेकिन यह पूरी सच्चाई भी नहीं है।
असल में, प्रोडक्ट डिज़ाइन वही है जो आपके फोन को हाथ में पकड़ने पर अच्छा महसूस कराता है। यही वजह है कि कुछ पानी की बोतलें आसानी से खुल जाती हैं और कुछ नहीं। यही कारण है कि आप एक ऐप को लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, जबकि दूसरी को कुछ दिनों में छोड़ देते हैं। इन सबके पीछे किसी ने सोच-समझकर काम किया होता है—उसे ही प्रोडक्ट डिज़ाइनर कहा जाता है। और आज के समय में भारत में यह एक तेजी से बढ़ता हुआ करियर बन चुका है।
प्रोडक्ट डिज़ाइन क्या है?
तकनीकी रूप से, प्रोडक्ट डिज़ाइन एक ऐसी रणनीतिक प्रक्रिया है जिसमें किसी प्रोडक्ट को सोचने, बनाने और लगातार सुधारने का काम किया जाता है, ताकि वह यूज़र की समस्या को हल कर सके और बिज़नेस के लक्ष्य भी पूरे कर सके। इसमें यूज़र एक्सपीरियंस (UX), फंक्शनैलिटी और लुक—तीनों का संतुलन बनाया जाता है, चाहे वह कोई फिजिकल प्रोडक्ट हो या डिजिटल ऐप।
सरल शब्दों में कहें तो, प्रोडक्ट डिज़ाइन का मतलब है ऐसे प्रोडक्ट बनाना जो उपयोगी हों, देखने में अच्छे लगें और सही तरीके से काम भी करें।
क्या प्रोडक्ट डिज़ाइन एक अच्छा करियर है या सिर्फ ट्रेंड?
दुनियाभर में प्रोडक्ट डिज़ाइन का बाजार 2022 में लगभग 9.4 बिलियन डॉलर का था, जो 2030 तक बढ़कर 24.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान 9.6% से 12.5% की मजबूत ग्रोथ दर देखी जा रही है। इसका मतलब साफ है—इस क्षेत्र में लगातार अवसर बढ़ रहे हैं और कंपनियां अच्छे पैकेज पर लोगों को हायर कर रही हैं।
भारत में फ्रेशर प्रोडक्ट डिज़ाइनर्स की सैलरी आमतौर पर 4 से 7.8 लाख रुपये सालाना से शुरू होती है। कुछ सालों के अनुभव के बाद यह 10 से 15 लाख तक पहुंच सकती है। वहीं, बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु या मुंबई में सीनियर पदों पर यह 20 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। अब यह सिर्फ बैकअप करियर नहीं, बल्कि एक मजबूत और स्थिर प्रोफेशन बन चुका है।
12वीं के बाद कौन कर सकता है प्रोडक्ट डिज़ाइन?
इस क्षेत्र की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे कोई भी कर सकता है। चाहे आप साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स स्ट्रीम से हों—कोई फर्क नहीं पड़ता। जरूरी है आपकी जिज्ञासा और चीजों को समझने की इच्छा।
अगर आप 12वीं के बाद शुरुआत करना चाहते हैं, तो आप B.Des (प्रोडक्ट डिज़ाइन) कर सकते हैं, जो 4 साल का कोर्स होता है। इसे NID, IIAD, The Design Village, MIT ADT, VGU जैसे संस्थानों से किया जा सकता है। अगर आप कम समय में शुरुआत करना चाहते हैं तो डिप्लोमा भी एक अच्छा विकल्प है। वहीं, अगर आपने किसी अन्य विषय में ग्रेजुएशन किया है, तो M.Des करके भी इस फील्ड में आ सकते हैं।
प्रोडक्ट डिज़ाइन के लिए एंट्रेंस एग्जाम
टॉप डिजाइन संस्थानों में एडमिशन के लिए कुछ प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम देने होते हैं, जैसे:
– UCEED
– NID DAT
– CEED
– NIFT Entrance
– AIDAT (All India Design Aptitude Test)
इन परीक्षाओं में रटने से ज्यादा आपकी क्रिएटिव सोच, ऑब्जर्वेशन स्किल और विज़ुअल समझ को परखा जाता है।
प्रोडक्ट डिज़ाइन में क्या सिखाया जाता है?
इस कोर्स में आपको प्रोडक्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाती है—आइडिया से लेकर लॉन्च तक। इसमें रिसर्च, स्केचिंग, 3D मॉडलिंग (CAD), प्रोटोटाइप बनाना और मटेरियल की समझ शामिल होती है। साथ ही, क्रिएटिव थिंकिंग, डिजाइन थिंकिंग और एनालिसिस जैसी जरूरी स्किल्स भी विकसित की जाती हैं।
प्रोडक्ट डिज़ाइन एक ऐसा क्षेत्र है जो हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और फर्नीचर जैसी लगभग हर इंडस्ट्री में उपयोगी है। यह एक ऐसा करियर है जिसमें आप अपने काम को रोज़मर्रा की जिंदगी में देखते हैं।
अगर आप अक्सर सोचते हैं कि “यह चीज़ ऐसे क्यों बनाई गई है, वैसी क्यों नहीं?”—तो समझ लीजिए, प्रोडक्ट डिज़ाइन आपके लिए ही है। सही एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करें और भारत के अच्छे डिजाइन संस्थान से पढ़ाई करके इस करियर में कदम रखें।




Add comment