
देश में अपराध जांच प्रणाली को और वैज्ञानिक व आधुनिक बनाने के लिए Ministry of Home Affairs ने National Forensic Sciences University (NFSU) के विस्तार को मंजूरी दे दी है। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में 14 नए कैंपस स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य अपराध जांच में वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल को बढ़ाना और भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
राज्यसभा में जानकारी देते हुए Bandi Sanjay Kumar ने बताया कि ये नए कैंपस मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा, गोवा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में स्थापित किए जाएंगे। इनमें से कुछ कैंपस फिलहाल अस्थायी परिसरों से संचालित हो रहे हैं, जबकि स्थायी ढांचे का निर्माण जारी है।
फॉरेंसिक इकोसिस्टम को मिलेगा मजबूती
यह विस्तार सिर्फ नए कैंपस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की फॉरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने की एक व्यापक योजना का हिस्सा है। इसके जरिए शैक्षणिक संस्थानों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
सरकार की योजना है कि कुछ NFSU कैंपस को Central Forensic Science Laboratory (CFSL) के साथ जोड़ा जाए, ताकि प्रशिक्षण, शोध और फॉरेंसिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को और मजबूत किया जा सके।
किन्हें मिलेगा लाभ?
इस पहल का फायदा कई क्षेत्रों को मिलेगा। कानून प्रवर्तन एजेंसियां, न्यायिक अधिकारी, खुफिया सेवाएं, बैंकिंग सेक्टर और कॉरपोरेट सुरक्षा से जुड़े पेशेवर इससे लाभान्वित होंगे। इससे न सिर्फ विशेषज्ञों और आधुनिक उपकरणों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, बल्कि जांच प्रक्रिया अधिक साक्ष्य-आधारित होगी और न्याय मिलने में होने वाली देरी भी कम हो सकेगी।
एक बड़े बदलाव की ओर संकेत
NFSU का यह विस्तार पारंपरिक पुलिसिंग से हटकर विज्ञान-आधारित जांच की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। खासकर साइबर अपराध और वित्तीय अपराध जैसे जटिल मामलों में मजबूत फॉरेंसिक ढांचा अब बेहद जरूरी हो गया है।
भोपाल और नागपुर जैसे शहरों के आसपास नए कैंपस स्थापित होने से छात्रों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह पहल शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




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