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Women's Participation in STEM in India: The Challenge from Degree to Career

भारत में STEM में महिलाओं की भागीदारी: डिग्री से करियर तक की चुनौती

Women's Participation in STEM in India: The Challenge from Degree to Career

भारत दुनिया के सबसे बड़े STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) महिला प्रतिभा समूहों में से एक तैयार कर रहा है—फिर भी बड़ी संख्या में महिलाएं लंबे समय तक करियर में टिक नहीं पातीं। Ernst & Young की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में STEM ग्रेजुएट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 42.6% है, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। लेकिन जैसे ही करियर की शुरुआत होती है, यह मजबूत उपस्थिति तेजी से घट जाती है, जो एक गहरी संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करती है।

सबसे बड़ी गिरावट ग्रेजुएशन के तुरंत बाद देखने को मिलती है। बड़ी संख्या में महिलाएं STEM की डिग्री तो पूरी करती हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम ही नौकरी में प्रवेश कर पाती हैं या लंबे समय तक टिक पाती हैं। इस स्थिति को “लीकी पाइपलाइन” कहा जाता है, जहां शिक्षा से रोजगार तक का संक्रमण कमजोर पड़ जाता है।

इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सामाजिक अपेक्षाएं आज भी एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं। Indian Institute of Management Ahmedabad के शोध के अनुसार, महिलाएं रोजाना औसतन 7.2 घंटे बिना वेतन के घरेलू काम में लगाती हैं, जबकि पुरुष केवल 2.8 घंटे। यह असंतुलन खासकर करियर की शुरुआत में महिलाओं को समझौते करने के लिए मजबूर करता है।

कार्यस्थल की चुनौतियां भी इस समस्या को और बढ़ाती हैं। कई STEM क्षेत्रों को आज भी कठोर, पुरुष-प्रधान और सहयोगी सुविधाओं की कमी वाला माना जाता है। लचीले काम के घंटे, चाइल्डकेयर सपोर्ट और करियर में दोबारा वापसी के अवसरों की कमी महिलाओं के लिए मुश्किलें पैदा करती है। इसके अलावा, भर्ती, प्रमोशन और नेतृत्व के अवसरों में छिपे पूर्वाग्रह भी उनके करियर ग्रोथ को धीमा कर देते हैं।

यह समस्या वरिष्ठ स्तरों पर और भी गंभीर हो जाती है। एंट्री-लेवल STEM नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 28.9% है, लेकिन डायरेक्टर स्तर पर यह घटकर 18.1% रह जाती है और शीर्ष नेतृत्व में केवल 12–14% के आसपास। इसके विपरीत, गैर-STEM क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और स्थायित्व बेहतर है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या केवल वर्कफोर्स में भागीदारी की नहीं, बल्कि STEM कार्य संस्कृति में भी है।

इसके अलावा, कुछ प्रणालीगत कमियां भी हैं—स्कूल स्तर पर गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा तक असमान पहुंच, STEM डिग्री की ऊंची लागत और मेंटरशिप नेटवर्क की कमी। ये सभी कारक मिलकर महिलाओं के लिए करियर का रास्ता सीमित और कई बार हतोत्साहित करने वाला बना देते हैं।

हालांकि, कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आ रहे हैं। भारत में महिलाओं की कुल कार्यबल भागीदारी हाल के वर्षों में बढ़ी है और IT, हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भर्ती भी बढ़ रही है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में अपस्किलिंग ट्रेंड महिलाओं की भागीदारी को बेहतर बना रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर भी यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। World Economic Forum का अनुमान है कि 2030 तक दुनिया में 8.5 करोड़ कुशल कर्मचारियों की कमी हो सकती है, खासकर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग में। ऐसे में भारत के लिए STEM में महिलाओं को बनाए न रख पाना लगभग 8.5 ट्रिलियन डॉलर के संभावित आर्थिक नुकसान में बदल सकता है।

संदेश साफ है—भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि उसे खोने का खतरा है। जब तक इन संरचनात्मक बाधाओं को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक देश विश्व-स्तरीय महिला STEM प्रतिभा तैयार तो करता रहेगा, लेकिन उन्हें उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने से पहले ही खो देगा।

Tags: Women in STEM, India STEM Report, Women Workforce India, STEM Careers India, Gender Gap STEM, Ernst & Young Report, Women Employment India, AI Upskilling India

Asmita Sarkar

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