
Central Board of Secondary Education द्वारा शुरू किया गया ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) भारत की शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह 12 अंकों की एक यूनिक, आजीवन अकादमिक आईडी है, जिसका उद्देश्य छात्रों की पूरी शैक्षणिक यात्रा—मार्कशीट, प्रमाण पत्र से लेकर सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तक—को एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।
यह पहल जहां एक ओर सुविधाजनक और आधुनिक व्यवस्था का वादा करती है, वहीं दूसरी ओर डेटा प्राइवेसी और लंबे समय तक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
क्या हैं APAAR के फायदे?
APAAR का मूल उद्देश्य छात्रों के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित तरीके से संग्रहित करना है। DigiLocker जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए यह सिस्टम कागजी काम को कम कर सकता है, दस्तावेज खोने की समस्या को खत्म कर सकता है और स्कूल बदलने, कॉलेज में प्रवेश लेने या नौकरी के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है।
छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों दोनों के लिए यह प्रशासनिक बोझ कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
डेटा सुरक्षा को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
हालांकि, APAAR को लेकर उठ रही चिंताएं नई नहीं हैं। भारत में बड़े पैमाने पर लागू पहचान प्रणालियों—जैसे आधार—के अनुभव ने दिखाया है कि केंद्रीकृत डेटाबेस डेटा लीक और दुरुपयोग के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते।
APAAR में भी छात्रों की संवेदनशील जानकारी जैसे आधार से जुड़ी पहचान, माता-पिता का विवरण और लंबी अवधि का शैक्षणिक रिकॉर्ड शामिल होता है। जब इतनी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही जगह संग्रहित होती है, तो यह साइबर हमलों के लिए आकर्षक लक्ष्य बन सकती है और किसी भी संभावित डेटा लीक का असर काफी बड़ा हो सकता है।
“फंक्शन क्रीप” का खतरा क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि APAAR जैसे सिस्टम में “फंक्शन क्रीप” का खतरा भी मौजूद है। इसका मतलब है कि जो डेटा एक उद्देश्य के लिए इकट्ठा किया गया है, वह समय के साथ अन्य कामों में भी इस्तेमाल हो सकता है।
शिक्षा को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया सिस्टम भविष्य में छात्रों की प्रोफाइलिंग, एडमिशन पर असर डालने या नौकरी से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह स्थिति निष्पक्षता और छात्रों के अधिकारों पर सवाल खड़े करती है, क्योंकि हर व्यक्ति को समय के साथ खुद को बदलने और आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
कानून क्या कहता है?
भारत में डेटा सुरक्षा के लिए Digital Personal Data Protection Act, 2023 लागू है। इस कानून के तहत बच्चों के डेटा को एकत्र करने और उपयोग करने के लिए माता-पिता की स्पष्ट और जानकारीपूर्ण सहमति जरूरी होती है। इसके अलावा, बच्चों के डेटा के ट्रैकिंग और लक्षित उपयोग पर भी सीमाएं तय की गई हैं।
हालांकि, इन नियमों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें कितनी सख्ती से लागू और मॉनिटर किया जाता है।
भरोसा कैसे बनेगा?
APAAR की सफलता सिर्फ इसके उद्देश्य पर नहीं, बल्कि इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा, डेटा एक्सेस पर सख्त नियंत्रण, पारदर्शी नीतियां और स्वतंत्र निगरानी जरूरी है।
माता-पिता और छात्रों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके डेटा तक कौन पहुंच सकता है, कितने समय तक और किस उद्देश्य से इसका उपयोग किया जाएगा। साथ ही, शिकायतों के समाधान के लिए भरोसेमंद व्यवस्था भी होनी चाहिए।
संतुलन जरूरी है
APAAR भारत में शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने की क्षमता रखता है। यह छात्रों के अकादमिक रिकॉर्ड को आसान और सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
लेकिन, मजबूत सुरक्षा उपायों के बिना यही सिस्टम निजता के लिए खतरा बन सकता है और भविष्य के अवसरों को भी प्रभावित कर सकता है।
बच्चों से जुड़े किसी भी सिस्टम में भरोसा सबसे अहम होता है—और यह भरोसा केवल वादों से नहीं, बल्कि लगातार और जिम्मेदार कार्रवाई से ही बनता है।




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