
विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना अब भारत में ही साकार हो सकता है। देश में जल्द खुलने जा रहे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के कैंपस के साथ छात्रों के लिए ₹1000 करोड़ का बड़ा स्कॉलरशिप फंड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर की शिक्षा को भारत में ही सुलभ और किफायती बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय—जैसे University of Aberdeen, University of Bristol, Illinois Institute of Technology, University of Liverpool, Victoria University और University of York—भारत में अपने कैंपस शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इन संस्थानों में अगस्त और सितंबर 2026 से दाखिला प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
10% से 100% तक फीस में छूट
इस स्कॉलरशिप योजना के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर पढ़ाई करने वाले छात्रों को सहायता दी जाएगी। चयनित छात्रों को 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस में छूट मिल सकती है।
इससे खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) जैसे लोकप्रिय और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में पढ़ाई करना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा।
विदेश जाने का खर्च हो सकता है कम
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत से हर एक विदेशी छात्र के मुकाबले करीब 19 छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। इससे हर साल करीब 70 अरब डॉलर का खर्च विदेशों में शिक्षा पर होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 15 से 20 प्रतिशत छात्र भी भारत में ही पढ़ाई करना शुरू कर दें, तो देश को हर साल 10 से 14 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। यह स्कॉलरशिप योजना इसी बदलाव को तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
मेरिट और जरूरत दोनों का रखा गया ध्यान
इस स्कॉलरशिप ढांचे में दो तरह की सहायता शामिल है—मेरिट आधारित और जरूरत आधारित। जहां मेरिट स्कॉलरशिप का उद्देश्य प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करना है, वहीं जरूरत आधारित सहायता का लक्ष्य छोटे शहरों (टियर 2 और टियर 3) के छात्रों को अवसर देना है।
इस पहल से पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों और महिला छात्रों की भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, यह योजना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रतिभा को विकसित करने में मदद करेगी।
भारत को ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने की दिशा
यह पहल न केवल छात्रों के लिए फायदेमंद है, बल्कि भारत को एक मजबूत ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने की दिशा में भी अहम कदम है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देश में ही सुलभ हो जाती है, तो छात्रों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और विदेश जाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
कुल मिलाकर, ₹1000 करोड़ की यह स्कॉलरशिप योजना उन छात्रों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन ऊंची फीस के कारण अब तक पीछे रह जाते थे।




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