
लंदन स्थित Birkbeck, University of London को University Grants Commission (UGC) की ओर से बेंगलुरु में अपना ग्लोबल कैंपस स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) सौंपा गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम भारतीय उच्च शिक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बेंगलुरु कैंपस शुरू होने के बाद भारतीय छात्रों को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्रियां करीब 60 प्रतिशत कम लागत पर उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि कम फीस के बावजूद पढ़ाई का स्तर, रिसर्च आधारित शिक्षण और इंडस्ट्री से जुड़ा पाठ्यक्रम बिल्कुल यूके कैंपस जैसा ही रहेगा। इससे छात्रों को देश में रहकर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा।
यह पहल भारत के उस लक्ष्य को भी मजबूती देती है, जिसके तहत 2030 तक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। साथ ही, इसका उद्देश्य देश के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की पहुंच को व्यापक बनाना है।
उच्च शिक्षा सचिव Vineet Joshi ने कहा कि लेटर ऑफ इंटेंट का सौंपा जाना भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक शिक्षा के नए द्वार खोलता है। उन्होंने बताया कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे उच्च शिक्षा तंत्र पर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के भरोसे को भी दर्शाता है। उनके अनुसार, UGC के प्रगतिशील नियमों के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले वैश्विक संस्थानों को भारत में स्थापित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे छात्रों को विदेश में पढ़ाई की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम खर्च पर विश्वस्तरीय शिक्षा मिल सकेगी। यह कदम शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने और ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने के लिए अहम है।
साल 1823 में स्थापित Birkbeck, University of London अपने लचीले और करियर-फोकस्ड एजुकेशन मॉडल के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर Sally Wheeler ने कहा कि बेंगलुरु कैंपस के जरिए इस विरासत को भारत में लाया जाएगा, जहां अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ रोजगार के अवसरों और इंडस्ट्री कनेक्शन पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि Birkbeck जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों का भारत में आना देश की उस बड़ी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जिसके तहत 2030 तक भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल छात्रों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि रिसर्च सहयोग को भी मजबूती मिलेगी और एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी नॉलेज इकोनॉमी के निर्माण में मदद मिलेगी।




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