
स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए Central Board of Secondary Education अब पारंपरिक पढ़ाई के तरीके से आगे बढ़ रहा है। रट्टा लगाने वाली पढ़ाई की जगह अब प्रैक्टिकल नॉलेज और स्किल-बेस्ड लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में बोर्ड ने सभी स्कूलों में ‘कम्पोजिट स्किल लैब्स’ (Composite Skill Labs) शुरू करने का फैसला लिया है।
यह पहल National Education Policy 2020 के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य छात्रों को स्कूल स्तर पर ही रोजगार और जीवन से जुड़ी स्किल्स सिखाना है।
क्या होंगी Composite Skill Labs
कम्पोजिट स्किल लैब्स ऐसी जगह होंगी जहां छात्र सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि अपने हाथों से काम करके सीखेंगे। यहां उन्हें टेक्नोलॉजी, मशीनों और रोजमर्रा की सेवाओं से जुड़ी स्किल्स का प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा।
CBSE के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों में इन लैब्स को दो तरह से बनाया जा सकता है—या तो कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए करीब 600 वर्ग फुट की एक बड़ी लैब, या फिर दो अलग-अलग लैब्स (प्रत्येक 400 वर्ग फुट) जिनमें एक कक्षा 6 से 10 और दूसरी 11 से 12 के छात्रों के लिए होगी।
इन लैब्स को 22 अगस्त 2027 से सभी CBSE स्कूलों में लागू करना अनिवार्य किया गया है। नए स्कूलों को भी शुरुआत से ही यह सुविधा तैयार करनी होगी।
किन-किन क्षेत्रों में मिलेगी ट्रेनिंग
इन लैब्स में छात्रों को तीन प्रमुख क्षेत्रों में स्किल्स सिखाई जाएंगी। पहला, ‘Life Forms’, जिसमें खेती, बागवानी और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां शामिल होंगी। दूसरा, ‘Machines and Materials’, जहां कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल कामों की ट्रेनिंग दी जाएगी। तीसरा, ‘Human Services’, जिसमें हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म और बैंकिंग जैसी सेवाओं की समझ विकसित की जाएगी।
स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अपने आसपास के उद्योग और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से विषय चुनें, ताकि छात्रों को आगे चलकर इंटर्नशिप और रोजगार के बेहतर मौके मिल सकें।
AI और नई तकनीकों पर खास फोकस
तेजी से बदलती दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा से जुड़े क्षेत्रों की मांग बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए CBSE ने स्कूलों को AI पर भी ध्यान देने को कहा है। जहां पहले से Atal Tinkering Labs मौजूद हैं, वहां इनका इस्तेमाल AI और नई तकनीकों की ट्रेनिंग के लिए किया जा सकता है।
सिर्फ नौकरी नहीं, उद्यमिता पर भी जोर
इस बदलाव का मकसद सिर्फ छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे खुद का काम शुरू कर सकें। स्किल-आधारित शिक्षा से छात्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वे भविष्य में रोजगार देने वाले भी बन सकते हैं।
क्यों अहम है यह पहल
स्कूल स्तर पर स्किल डेवलपमेंट की यह पहल शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे छात्रों को शुरुआती दौर में ही अपनी रुचि और करियर की दिशा समझने में मदद मिलेगी।
अगर यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में स्कूल शिक्षा का स्वरूप काफी बदल सकता है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ कौशल भी उतना ही जरूरी होगा।




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