
बॉलीवुड के दमदार एक्शन हीरो अक्षय कुमार ने आज की फिल्मों में VFX और AI के बढ़ते इस्तेमाल पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है। 58 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस और मार्शल आर्ट्स के लिए मशहूर अक्षय कुमार का मानना है कि आज के दौर में एक्शन फिल्मों से असलीपन धीरे-धीरे गायब होता जा रहा है। कराटे में ब्लैक बेल्ट और मुए थाई, ताइक्वांडो व कुडो जैसी विधाओं में दक्षता रखने वाले अक्षय अब भी वही रियल स्टंट्स का रोमांच वापस लाना चाहते हैं, जिसने उनके करियर की पहचान बनाई।
असली एक्शन से डिजिटल दुनिया तक का सफर
अक्षय कुमार ने अपनी शुरुआती हिट फिल्मों जैसे खिलाड़ी सीरीज़, मोहरा, हॉलिडे: ए सोल्जर इज़ नेवर ऑफ़ ड्यूटी, गब्बर इज़ बैक और सूर्यवंशी का जिक्र करते हुए कहा कि पहले एक्शन सीन पूरी तरह असली होते थे, जबकि अब ज्यादातर काम VFX पर निर्भर हो गया है। उनके मुताबिक, पहले हेलिकॉप्टर से कूदना या हाथों से लड़ाई करना जैसे स्टंट्स में असली मेहनत और जोखिम शामिल होता था, जो आज की डिजिटल तकनीक में कहीं खो गया है।
वे मानते हैं कि आज के एक्शन सीन भले ही तकनीकी रूप से परफेक्ट दिखते हों, लेकिन उनमें वह वास्तविकता और रोमांच नहीं होता, जो दर्शकों को बांध सके। अक्षय का कहना है कि वे एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते हैं, जिसमें वे खुद हर स्टंट करें, बिना किसी डिजिटल सहारे के।
AI और VFX पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और VFX के बढ़ते प्रभाव को लेकर अक्षय कुमार ने कहा कि जरूरत से ज्यादा परफेक्शन दर्शकों को भावनात्मक रूप से दूर कर देता है। उन्होंने इसे एक पेंटिंग के उदाहरण से समझाया—जहां असली पेंटिंग में छोटी-छोटी खामियां भी उसे जीवंत बनाती हैं, वहीं प्रिंटेड कॉपी भले ही परफेक्ट हो, लेकिन उसमें आत्मा नहीं होती।
दिलचस्प बात यह है कि अक्षय खुद भी स्त्री 2 जैसी फिल्मों के जरिए VFX आधारित सिनेमाई दुनिया का हिस्सा रह चुके हैं। इसके बावजूद उनका मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल सहायक के रूप में होना चाहिए, न कि पूरी तरह विकल्प के रूप में।
क्या लौटेगा रियल एक्शन का दौर?
अक्षय कुमार की यह टिप्पणी सिर्फ पुरानी यादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री के लिए एक दिशा भी सुझाती है। उनका मानना है कि फिल्म निर्माताओं को CGI पर भारी खर्च करने के बजाय स्टंट कोऑर्डिनेशन, कलाकारों की ट्रेनिंग और असली एक्शन पर निवेश करना चाहिए।
हालांकि, इसके सामने चुनौतियां भी हैं—सुरक्षा, बीमा लागत और चोट का जोखिम ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से आज के समय में VFX का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। फिर भी, कुछ फिल्मों की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक आज भी असली एक्शन को पसंद करते हैं।
अंत में, अक्षय कुमार का संदेश साफ है—तकनीक जरूरी है, लेकिन असली हीरोइज्म पसीने और मेहनत से आता है, न कि सिर्फ स्क्रीन पर बने डिजिटल इफेक्ट्स से। अब देखना यह होगा कि बॉलीवुड आगे किस दिशा में जाता है—पूरी तरह VFX की ओर या फिर असली एक्शन की वापसी होती है।




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