
इंग्लैंड में स्कूली बच्चों के बीच बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल को लेकर अब सरकार ने सख्त कदम उठाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) के नेतृत्व में सरकार ने सभी स्कूलों में स्मार्टफोन ले जाने और इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगाने का फैसला किया है। पहले यह केवल एक सलाह थी, लेकिन अब इसे नियम का रूप दिया जा रहा है, जिसका पालन करना सभी स्कूलों के लिए जरूरी होगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अभिभावकों, शिक्षकों और विपक्ष की ओर से लंबे समय से इस मुद्दे पर दबाव बनाया जा रहा था। सरकार का मानना है कि इससे पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा और छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहेगा।
क्यों बदलना पड़ा रुख?
शुरुआत में प्रधानमंत्री स्टार्मर इस तरह के सख्त कानून के पक्ष में नहीं थे। उनका कहना था कि अधिकांश स्कूल पहले ही अपने स्तर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल को नियंत्रित कर चुके हैं। लेकिन मामला तब बदला जब ब्रिटेन की संसद के उच्च सदन House of Lords में स्मार्टफोन बैन को लेकर प्रस्ताव पेश हुआ और उसे भारी समर्थन मिला।
इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद सरकार पर कानून लाने का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर सरकार पीछे हटती तो नए शिक्षा विधेयक को पारित कराने में मुश्किलें आ सकती थीं।
नए कानून का क्या असर होगा?
सरकार के मुताबिक, अब स्मार्टफोन बैन केवल सुझाव नहीं रहेगा, बल्कि यह एक स्पष्ट कानूनी नियम होगा। हर स्कूल के हेड टीचर के लिए इसे लागू करना अनिवार्य होगा। केवल विशेष परिस्थितियों में ही इससे छूट दी जा सकेगी।
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि स्कूल परिसर में मोबाइल फोन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस कदम का उद्देश्य छात्रों के बीच ध्यान भटकाने वाले कारकों को कम करना और पढ़ाई का माहौल सुधारना है।
पहले से ही लागू थी पाबंदी
हालांकि जमीनी स्तर पर देखें तो ज्यादातर स्कूल पहले से ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। सर्वेक्षण बताते हैं कि इंग्लैंड के लगभग सभी प्राइमरी स्कूल और बड़ी संख्या में सेकेंडरी स्कूल मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पहले ही रोक लगा चुके हैं।
अभिभावकों का भी इस फैसले को समर्थन मिला है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, बहुत कम माता-पिता ऐसे हैं जो क्लास के दौरान बच्चों को फोन इस्तेमाल करने की अनुमति देने के पक्ष में हैं।
शिक्षकों और नेताओं की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेता Laura Trott ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कक्षा में अनुशासन बेहतर होगा और छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
वहीं Association of School and College Leaders के महासचिव पेपे डिआसियो ने इसे व्यावहारिक कदम बताया, लेकिन साथ ही सरकार को सुझाव दिया कि स्कूलों को पर्याप्त फंड भी दिया जाए। उनका कहना है कि मोबाइल फोन को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर या लॉक्ड पाउच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी नजर
स्मार्टफोन के साथ-साथ सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने पर भी विचार किया जा रहा है, जैसा कदम ऑस्ट्रेलिया में उठाया गया है।
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने टेक कंपनियों को साफ संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।




Add comment