
राजस्थान में स्कूली शिक्षा को तकनीक के जरिए बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब कॉपियों की जांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए करने की पहल शुरू हो गई है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत पायलट आधार पर जोधपुर से की गई है, जहां शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक सामने आए हैं।
चार दिन में जांची गई 3 लाख कॉपियां
शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर के करीब 1350 सरकारी स्कूलों को शामिल किया गया। इसमें कक्षा 6 से 9 तक के लगभग 75 हजार छात्रों की करीब 3 लाख कॉपियों की जांच AI की मदद से महज चार दिनों में पूरी कर ली गई। इतनी कम समय में बड़े पैमाने पर मूल्यांकन पूरा होना इस तकनीक की क्षमता को दिखाता है।
अगर यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल रहता है, तो इसे जल्द ही राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में लागू किया जा सकता है।
छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा विस्तृत फीडबैक
इस पहल का एक अहम फायदा यह है कि अब छात्रों को सिर्फ अंक ही नहीं, बल्कि उनकी परफॉर्मेंस की डिटेल रिपोर्ट भी मिलेगी। इस रिपोर्ट के जरिए यह समझना आसान होगा कि छात्र किस विषय या टॉपिक में मजबूत है और कहां सुधार की जरूरत है।
शिक्षकों को भी इस डेटा के आधार पर छात्रों को बेहतर तरीके से गाइड करने में मदद मिलेगी। वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों की पढ़ाई को ज्यादा स्पष्ट तरीके से समझ पाएंगे।
AI से कैसे होती है कॉपियों की जांच?
इस प्रक्रिया में एक खास AI आधारित एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पहले से ही परीक्षा का सिलेबस, प्रश्नों का डेटा और उनके मार्किंग पैटर्न को फीड किया जाता है। इसके बाद शिक्षक कॉपियों को स्कैन करके सिस्टम में अपलोड करते हैं।
AI एप कॉपी में लिखे जवाबों को पढ़ता है, हैंडराइटिंग को पहचानता है और जवाब की गुणवत्ता के आधार पर अंक देता है। खास बात यह है कि इस पायलट प्रोजेक्ट में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखी कॉपियों की जांच सफलतापूर्वक की गई है।
शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर लागू होता है, तो इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक हो सकती है। साथ ही शिक्षकों का समय भी बचेगा, जिसे वे पढ़ाई और छात्रों के मार्गदर्शन में लगा सकेंगे।
राजस्थान में AI के जरिए कॉपियों की जांच का यह प्रयोग शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का संकेत है। अगर यह पहल राज्यभर में लागू होती है, तो यह न सिर्फ मूल्यांकन प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बना सकती है।




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