
भारत में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी लाने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए एक नई रिसर्च साझेदारी शुरू की गई है। यह सहयोग Ashoka Centre for a People-Centric Energy Transition (ACPET), Ashoka University और Technology Innovation in Exploration & Mining Foundation (TEXMiN), जो IIT ISM Dhanbad में स्थापित है, के बीच शुरू हुआ है।
तीन साल की इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक खनिजों, टिकाऊ खनन (सस्टेनेबल माइनिंग), बंद पड़ी खदानों के पुन: उपयोग, नीति शोध और ऊर्जा-खनिज क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान विकसित करना है। यह पहल ऐसे समय में शुरू हुई है, जब लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, सेमीकंडक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद जरूरी बन गए हैं।
Dheeraj Kumar, जो TEXMiN के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और IIT (ISM) धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर हैं, ने कहा कि यह सहयोग खनन क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को तेजी से अपनाने में मदद करेगा, जिसमें सस्टेनेबिलिटी को केंद्र में रखा जाएगा। उनके अनुसार, यह पहल भारत के भविष्य के लिए सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ खनन को बढ़ावा दे सकती है।
इस साझेदारी के तहत यह भी अध्ययन किया जाएगा कि बंद हो चुकी खदानों का उपयोग रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन, पर्यावरण सुधार और स्थानीय समुदाय के विकास के लिए कैसे किया जा सकता है। साथ ही, खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय जोखिम, भूमि और जल उपयोग, कार्बन उत्सर्जन और जलवायु अनुकूलन जैसे मुद्दों पर भी शोध किया जाएगा।
Vaibhav Chowdhary, ACPET के निदेशक, ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन टिकाऊ होने के साथ-साथ समावेशी भी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह साझेदारी तकनीकी नवाचार को लोगों-केंद्रित नीति सोच के साथ जोड़ने का प्रयास है, जिससे खनिज, ऊर्जा सुरक्षा और समुदाय की मजबूती जैसे मुद्दों पर बेहतर समाधान निकल सकें।
दोनों संस्थान मिलकर तकनीकी रिपोर्ट, पॉलिसी ब्रीफ, शोध प्रकाशन और फंडिंग प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसके साथ ही फैकल्टी एक्सचेंज, छात्रों के बीच सहयोग, वर्कशॉप और कॉन्फ्रेंस के जरिए ज्ञान साझा करने को भी बढ़ावा दिया जाएगा।




Add comment