
National Institute of Technology Rourkela के शोधकर्ताओं ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की रिसर्च टीम ने एल्यूमिनियम आधारित एक हल्का नैनोकॉम्पोजिट विकसित किया है, जो विमान के लैंडिंग गियर की मजबूती और प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इस शोध की घोषणा 30 अप्रैल 2026 को की गई।
विमान के लैंडिंग गियर पर लैंडिंग और टैक्सींग के दौरान लगातार भारी दबाव और घर्षण पड़ता है। पारंपरिक एल्यूमिनियम अलॉय हल्के तो होते हैं, लेकिन ज्यादा लोड में जल्दी घिस जाते हैं। इससे वजन और टिकाऊपन के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए यह नया मटेरियल तैयार किया गया है।
इस रिसर्च का नेतृत्व मेटलर्जिकल एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर Syed Nasimul Alam ने किया। उनके साथ अर्चा घोष, आशुतोष दास, पंकज श्रीवास्तव, नित्यानंद साहू, पार्थ पटेल और दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी से वेलाफी मसोमी जैसे शोधकर्ताओं ने मिलकर यह प्रोजेक्ट पूरा किया। इस शोध के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल Materials Letters में प्रकाशित हुए हैं।
नया नैनोकॉम्पोजिट एल्यूमिनियम के साथ नैनो स्तर के मजबूत तत्वों को मिलाकर तैयार किया गया है। इसमें कार्बन नैनोट्यूब्स का उपयोग दबाव सहने की क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया, जबकि ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स से इसकी मैकेनिकल मजबूती बेहतर हुई। इसके अलावा हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का इस्तेमाल थर्मल स्थिरता बनाए रखने के लिए किया गया।
इन सभी तत्वों को समान रूप से फैलाने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद हाई-प्रेशर कॉम्पैक्शन और ऑक्सीजन-फ्री वातावरण में हीटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। इससे एक घना और मजबूत स्ट्रक्चर तैयार हुआ, जिसमें थ्री-डायमेंशनल नेटवर्क मौजूद है, जो लोड को बेहतर तरीके से संभालने में सक्षम है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस्तेमाल के दौरान इस मटेरियल की सतह पर एक पतली सुरक्षात्मक परत बन जाती है, जो घिसाव को काफी हद तक कम कर देती है। परीक्षण में यह पाया गया कि यह नैनोकॉम्पोजिट पारंपरिक धातुओं और अलॉय की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत तक बेहतर वियर रेजिस्टेंस, मजबूती और लंबी उम्र प्रदान करता है।
विमान के लैंडिंग गियर को भारी झटकों को सहना होता है और रनवे पर लगातार घर्षण का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह नया मटेरियल हल्के वजन के साथ ज्यादा मजबूती प्रदान कर सकता है, जिससे विमान की सुरक्षा और मेंटेनेंस दोनों में सुधार हो सकता है।
यह तकनीक खासतौर पर रक्षा विमानों और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जहां हल्के वजन और उच्च मजबूती दोनों जरूरी होते हैं। शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि यह मटेरियल अल्ट्रा हाई-स्ट्रेंथ स्टील, टाइटेनियम अलॉय और मौजूदा एल्यूमिनियम विकल्पों की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत तक ज्यादा किफायती साबित हो सकता है।
आगे की योजना के तहत टीम इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित करने पर काम कर रही है, ताकि पाउडर मेटलर्जी तकनीक के जरिए बड़े कंपोनेंट्स तैयार किए जा सकें और इसे वास्तविक एयरोस्पेस उपयोग में लाया जा सके।




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