
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बढ़ते भूजल संकट के बीच अब आम लोगों को जल संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का मौका मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश भूजल विभाग ने जनेश्वर मिश्रा पार्क (Janeshwar Mishra Park) में ‘सस्टेनेबिलिटी थीम पार्क’ विकसित करने की पहल शुरू की है। यह पार्क गोमती नगर इलाके में बनाया जा रहा है और इसे एक लर्निंग हब के रूप में तैयार किया जाएगा, जहां लोग पानी बचाने और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक तरीके सीख सकेंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पार्क में रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट और शहरी जल निकासी प्रबंधन जैसे मॉडल दिखाए जाएंगे। इनकी मदद से यह समझाया जाएगा कि घर और संस्थान बाहरी जल स्रोतों पर निर्भरता कैसे कम कर सकते हैं।
भूजल स्तर गिरने से बढ़ी चिंता
शहर के कई इलाकों में पानी 180 से 200 फीट की गहराई पर पहुंच चुका है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। भूजल विभाग के सहायक अभियंता आदित्य पांडेय के अनुसार, तेजी से गिरता जल स्तर और बढ़ता शहरी दबाव इस परियोजना की जरूरत को और अहम बना रहा है।
सीखने का नया अनुभव देगा पार्क
इस थीम पार्क में आने वाले लोग इंटरैक्टिव गैलरी, डिजिटल डिस्प्ले, 3D मॉडल और वर्चुअल रियलिटी के जरिए जल संसाधन, ऊर्जा संरक्षण, कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों को समझ सकेंगे। इसका उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को व्यवहार में बदलाव के लिए प्रेरित करना है।
यह परियोजना शहर में तेजी से हो रहे शहरीकरण और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पार्क में अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे, जहां पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी के विभिन्न पहलुओं को सरल तरीके से समझाया जाएगा।
2027 तक पूरा होने की उम्मीद
पार्क का निर्माण गेट नंबर 2 और गेट नंबर 3 के बीच किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों का लक्ष्य फरवरी 2027 तक इस परियोजना को पूरा करने का है।
करीब 15,676 वर्ग मीटर में फैलने वाले इस पार्क में एक ‘नॉलेज सेंटर’ भी बनाया जाएगा, जिसे ग्रीन बिल्डिंग सिद्धांतों पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा एम्फीथिएटर, स्काईवॉक और डेमोंस्ट्रेशन जोन जैसी सुविधाएं भी होंगी, जिससे लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
जल संरक्षण पर रहेगा खास फोकस
करीब ₹8.80 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में पांच साल तक संचालन और रखरखाव भी शामिल है। इसमें “Reduce, Reuse, Renew, Recover, Recycle, Recharge” मॉडल को अपनाया जाएगा, जिससे संसाधनों के बेहतर उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा।
यह पार्क पारंपरिक मनोरंजन स्थल की तरह नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा अनुभव आधारित केंद्र होगा जहां लोग सीखेंगे कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव करके पानी और अन्य संसाधनों की बचत कैसे की जा सकती है।
पर्यावरण जागरूकता का बनेगा मॉडल
देश के हैदराबाद, बेंगलुरु और विजयवाड़ा जैसे शहरों में पहले से ऐसे थीम पार्क मौजूद हैं। अब लखनऊ का यह प्रोजेक्ट भी पर्यावरण जागरूकता के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यह पहल न केवल जल संरक्षण बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, जिम्मेदार खपत और जल सुरक्षा जैसे बड़े लक्ष्यों को भी समर्थन देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट ज्ञान और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं—जो आज के समय में बेहद जरूरी है, जब शहर जल संकट और पर्यावरणीय दबाव का सामना कर रहे हैं।




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