
IIM लखनऊ (Indian Institute of Management Lucknow) के नोएडा कैंपस में इंटरनेशनल प्रोग्राम इन मैनेजमेंट फॉर एग्जीक्यूटिव्स (IPMX) के 19वें बैच के छात्रों ने इंडस्ट्री से जुड़ी वास्तविक बिजनेस चुनौतियों पर काम किया। यह गतिविधि Pansari Group के साथ आयोजित एक इंडस्ट्री-लिंक्ड केस प्रतियोगिता का हिस्सा थी, जिसमें छात्रों को FMCG सेक्टर की वास्तविक समस्याओं का समाधान तैयार करने का अवसर मिला।
इस प्रतियोगिता में IIM लखनऊ के एक वर्षीय फुल-टाइम एग्जीक्यूटिव MBA प्रोग्राम की 23 टीमों ने हिस्सा लिया। इनमें शामिल कई छात्र पहले से अलग-अलग क्षेत्रों में प्रोफेशनल अनुभव रखते हैं। छात्रों को फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर में आने वाली ऑपरेशनल और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण करने का कार्य दिया गया।
केस स्टडी में इन्वेंट्री मैनेजमेंट, डिमांड फोरकास्टिंग, प्रोडक्ट की शेल्फ-लाइफ को बेहतर बनाना और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क की कार्यक्षमता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। ये सभी पहलू तेजी से बढ़ रहे FMCG कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि स्टॉक, डिस्ट्रीब्यूशन और डिमांड प्लानिंग से जुड़े फैसले सीधे लागत, उत्पाद उपलब्धता और ग्राहकों तक पहुंच को प्रभावित करते हैं।
कई चरणों में मूल्यांकन के बाद छह टीमों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया। चयनित टीमों ने अपने समाधान और रणनीतियां Pansari Group के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कीं। अंतिम चरण में Pansari Group के मैनेजिंग डायरेक्टर Shammi Agarwal भी मौजूद रहे और उन्होंने छात्रों के साथ उनकी रणनीतियों पर चर्चा की।
इस दौरान IIM लखनऊ नोएडा कैंपस के वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इनमें Satyabhusan Dash, Kaushik Bhattacharya और Arvind Shroff प्रमुख रहे।
IIM लखनऊ नोएडा कैंपस के डीन सत्यभूषण दाश ने कहा कि छात्रों की टीमों ने इन्वेंट्री मैनेजमेंट, डिमांड फोरकास्टिंग, शेल्फ-लाइफ ऑप्टिमाइजेशन और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क एफिशिएंसी जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक और व्यवहारिक सुझाव तैयार किए।
इस तरह की गतिविधियों से छात्रों को केवल क्लासरूम तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक कारोबारी परिस्थितियों को समझने और उनके अनुसार समाधान विकसित करने का मौका मिलता है। खासतौर पर एग्जीक्यूटिव MBA छात्रों के लिए यह अनुभव अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे पहले से उद्योग जगत का अनुभव लेकर आते हैं और यहां उन्हें अकादमिक समझ को व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़ने का अवसर मिलता है।
यह पहल मैनेजमेंट एजुकेशन में तेजी से बदलते रुझानों को भी दर्शाती है। अब बिजनेस स्कूल केवल थ्योरी आधारित पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि केस-बेस्ड लर्निंग, प्रैक्टिकल प्रॉब्लम सॉल्विंग और इंडस्ट्री के साथ गहरे जुड़ाव पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
आज कंपनियां ऐसे मैनेजर्स चाहती हैं जो जटिल ऑपरेशनल चुनौतियों को समझकर तेजी से निर्णय ले सकें। ऐसे में इस प्रकार की अकादमिक गतिविधियां छात्रों को वास्तविक बिजनेस माहौल में निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर देती हैं।




Add comment